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घरेलू शेयर बाजार में गिरावट, सेंसेक्स 1,045 अंक लुढ़का

घरेलू शेयर बाजार में कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और बिकवाली के दबाव के चलते सेंसेक्स 1,045 अंक गिरकर 71,593.24 अंक पर बंद हुआ। एनएसई निफ्टी भी 22,230 अंक के स्तर से नीचे आ गया। इस गिरावट के पीछे विदेशी संस्थागत निवेशकों की बिकवाली और भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा ब्याज दरों में वृद्धि का भी हाथ है। जानें और क्या है इस गिरावट के पीछे का कारण और बाजार की स्थिति।
 

बाजार में गिरावट का कारण

मुंबई, 8 अक्टूबर: कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और बिकवाली के दबाव के चलते घरेलू शेयर बाजार में लगातार दूसरे दिन गिरावट आई। बीएसई सेंसेक्स 1,045 अंक गिरकर 71,593.24 अंक पर बंद हुआ, जबकि एनएसई निफ्टी 22,230 अंक के स्तर से नीचे आ गया। कच्चे तेल की कीमतों में वृद्धि और मौद्रिक नीति के सख्त होने की आशंका के कारण ब्याज दर से संबंधित जिंस और दैनिक उपयोग की वस्तुओं के निर्माताओं के शेयरों में बिकवाली हुई।


बीएसई सेंसेक्स, जो 30 शेयरों पर आधारित है, 1,045.46 अंक यानी 1.44 प्रतिशत गिरकर बंद हुआ। कारोबार के दौरान यह 1,310.95 अंक तक लुढ़क गया। इसी तरह, एनएसई निफ्टी 371.25 अंक यानी 1.64 प्रतिशत की गिरावट के साथ 22,231.80 अंक पर बंद हुआ, और यह 22,179.90 अंक के अपने 52 सप्ताह के निचले स्तर तक पहुंच गया।


कंपनियों का प्रदर्शन

सेंसेक्स में शामिल कंपनियों में आईटीसी, इंटरग्लोब एविएशन, पावर ग्रिड, भारत इलेक्ट्रॉनिक्स, अदाणी पोर्ट्स और एनटीपीसी प्रमुख रूप से नुकसान में रहीं। वहीं, टेक महिंद्रा, एक्सिस बैंक और इन्फोसिस के शेयरों में बढ़त देखने को मिली। वैश्विक तेल मानक ब्रेंट क्रूड 4.25 प्रतिशत बढ़कर 104.5 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया।


विदेशी निवेशकों की बिकवाली

शेयर बाजार के आंकड़ों के अनुसार, विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) ने बुधवार को 6,121.37 करोड़ रुपये मूल्य के शेयर बेचे। भारतीय रिजर्व बैंक ने बुधवार को अपनी प्रमुख नीतिगत दर रेपो को 0.25 प्रतिशत बढ़ाकर 5.50 प्रतिशत कर दिया, जो कि चार साल में पहली बार हुआ है।


केंद्रीय बैंक ने दरों में कटौती की संभावना को खारिज करते हुए संकेत दिया कि बढ़ती महंगाई, कमजोर रुपये और कच्चे तेल की ऊंची कीमतों के बीच आगे भी नीतिगत दर बढ़ाई जा सकती है। रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति ने आम सहमति से रेपो दर बढ़ाने का निर्णय लिया।


विश्लेषकों की राय

जियोजीत इन्वेस्टमेंट्स के शोध प्रमुख विनोद नायर ने कहा, "घरेलू बाजार में बिकवाली का दौर जारी है। रिजर्व बैंक की सख्त मौद्रिक नीति का असर ब्याज दर से संवेदनशील क्षेत्रों पर पड़ा है। विदेशी संस्थागत निवेशकों की लगातार बिकवाली, बॉण्ड प्रतिफल का ऊंचा होना और रुपये में गिरावट ने इस दबाव को और बढ़ाया है।"


उन्होंने यह भी कहा कि भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर कच्चे तेल की अस्थिर कीमतें एक निरंतर चुनौती बनी हुई हैं।


वैश्विक बाजारों का प्रदर्शन

एशिया के अन्य बाजारों में दक्षिण कोरिया का कॉस्पी, जापान का निक्की, चीन का एसएसई कम्पोजिट और हांगकांग का हैंग सेंग उल्लेखनीय गिरावट के साथ बंद हुए। यूरोप के प्रमुख बाजारों में भी दोपहर के कारोबार में गिरावट का रुख रहा। अमेरिकी बाजार भी बुधवार को गिरावट के साथ बंद हुए थे।


सेंसेक्स बुधवार को 429.11 अंक टूटकर 72,638.70 अंक पर बंद हुआ था, जबकि निफ्टी 173.05 अंक की गिरावट के साथ 22,603.05 अंक पर रहा।