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चंडीगढ़ में कलाग्राम शिल्प मेला 2026: कला और संस्कृति का अद्भुत संगम

चंडीगढ़ में 27 नवंबर से 6 दिसंबर 2026 तक कलाग्राम में वार्षिक शिल्प मेला आयोजित किया जाएगा। इस मेले में देशभर के शिल्पकार अपने हस्तनिर्मित उत्पादों का प्रदर्शन करेंगे, साथ ही लोक संगीत और पारंपरिक नृत्य का आनंद भी लिया जा सकेगा। विशेष रूप से विद्यार्थियों के लिए दोपहर 2 बजे तक निशुल्क प्रवेश की व्यवस्था की गई है। यह आयोजन भारतीय कला और संस्कृति को बढ़ावा देने का एक महत्वपूर्ण मंच होगा।
 

चंडीगढ़ शिल्प मेला 2026:

चंडीगढ़ में कला, संस्कृति और पारंपरिक हस्तशिल्प के प्रेमियों के लिए एक विशेष आयोजन होने जा रहा है। कलाग्राम में 27 नवंबर से 6 दिसंबर 2026 तक वार्षिक शिल्प मेला आयोजित किया जाएगा। इस दस दिवसीय मेले में विभिन्न राज्यों की हस्तकला, लोक संगीत, पारंपरिक नृत्य और क्षेत्रीय व्यंजनों का अनुभव किया जा सकेगा। हर शाम आयोजित होने वाले स्टार नाइट्स और कलाकारों की प्रस्तुतियां मेले के मुख्य आकर्षण में शामिल होंगी। यह आयोजन उत्तर क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र और चंडीगढ़ प्रशासन के सांस्कृतिक विभाग द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित किया जा रहा है। मेले का उद्देश्य पारंपरिक भारतीय कला और शिल्प को बढ़ावा देना और शिल्पकारों तथा लोक कलाकारों को अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने का मंच प्रदान करना है।


देशभर के शिल्पकार लगाएंगे स्टॉल

इस मेले में विभिन्न राज्यों से आए शिल्पकार अपने हस्तनिर्मित उत्पादों और पारंपरिक कलाकृतियों का प्रदर्शन करेंगे। यहां लकड़ी पर नक्काशी, मिट्टी के बर्तन बनाने और चित्रकारी जैसी कलाओं का लाइव प्रदर्शन देखने को मिलेगा। दर्शक शिल्पकारों को काम करते हुए देख सकेंगे और उनकी कला की बारीकियों को समझ पाएंगे। मेले में कपड़ा निर्माण, फोटोग्राफी से जुड़ी गतिविधियां और प्रतियोगिताएं भी आयोजित की जाएंगी। पद्मश्री सम्मानित कलाकारों और पुरस्कार प्राप्त शिल्पकारों की भागीदारी से इस आयोजन को विशेष पहचान मिलने की उम्मीद है। राष्ट्रीय शिल्प मेले का उद्देश्य देश की हस्तकला, हथकरघा और पारंपरिक कलाओं को प्रोत्साहित करना है।


हर शाम होंगी स्टार नाइट्स-लोक नृत्य

कलाग्राम में दिन के समय शिल्प प्रदर्शन और सांस्कृतिक गतिविधियां आयोजित होंगी, जबकि शाम को संगीत कार्यक्रम और स्टार नाइट्स दर्शकों के आकर्षण का केंद्र बनेंगी। विभिन्न राज्यों के कलाकार अपने पारंपरिक लोक नृत्य और संगीत प्रस्तुत करेंगे। इन प्रस्तुतियों के माध्यम से दर्शकों को भारत की विविध सांस्कृतिक परंपराओं को करीब से देखने का अवसर मिलेगा। पंजाब, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, राजस्थान और अन्य राज्यों की लोक कलाओं के साथ क्षेत्रीय संगीत और पारंपरिक वाद्ययंत्र भी मेले की रौनक बढ़ाएंगे।


खाने-पीने के शौकीनों के लिए होगा खास

शिल्प और संगीत के अलावा मेले में विभिन्न राज्यों के पारंपरिक व्यंजनों के स्टॉल भी लगाए जाएंगे। यहां आने वाले लोग क्षेत्रीय पकवानों का स्वाद लेने के साथ विभिन्न राज्यों की खानपान परंपराओं से परिचित हो सकेंगे। मेले में थीम आधारित प्रवेश द्वार, सजावट और पारंपरिक शैली में तैयार किए गए स्टॉल भी आकर्षण का हिस्सा होंगे। हस्तनिर्मित वस्तुओं की खरीदारी करने वाले लोगों के लिए यह आयोजन खास रहेगा, क्योंकि यहां उन्हें अलग-अलग क्षेत्रों के शिल्पकारों के उत्पाद एक ही जगह पर देखने और खरीदने का मौका मिलेगा।


विद्यार्थियों को दोपहर 2 बजे तक निशुल्क प्रवेश

बच्चों और विद्यार्थियों को भारतीय कला और संस्कृति से जोड़ने के लिए विशेष व्यवस्था की गई है। समूह में आने वाले बच्चों और विद्यार्थियों को दोपहर 2 बजे तक निशुल्क प्रवेश दिया जाएगा। इससे स्कूलों और शैक्षणिक संस्थानों के विद्यार्थियों को पारंपरिक शिल्प, लोक संगीत और क्षेत्रीय संस्कृति को करीब से जानने का अवसर मिल सकेगा।