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चीनी और गुड़ की कीमतों में भारी वृद्धि: उपभोक्ताओं की चिंता बढ़ी

हाल के दिनों में चीनी और गुड़ की कीमतों में भारी वृद्धि ने घरेलू उपभोक्ताओं और व्यापारियों के बीच चिंता पैदा कर दी है। पिछले दो महीनों में चीनी की कीमतें 20 रुपये प्रति किलो तक बढ़ गई हैं, जबकि गुड़ की कीमतों में भी 30 से 40 रुपये का उछाल आया है। रक्षाबंधन जैसे त्योहारों के चलते मिठाइयों और बेकरी उत्पादों की मांग में वृद्धि होने की संभावना है, जिससे कीमतों पर और दबाव पड़ सकता है। जानें इस स्थिति के पीछे के कारण और भविष्य में कीमतों में गिरावट की संभावनाएं।
 

चीनी और गुड़ की कीमतों में वृद्धि


चीनी और गुड़ की कीमतों में वृद्धि: हाल ही में चीनी की कीमतों में तेजी ने घरेलू उपभोक्ताओं, हलवाई और बेकरी व्यवसायियों के बीच चिंता बढ़ा दी है। पिछले दो महीनों में रिटेल बाजार में चीनी की कीमतें लगभग 20 रुपये प्रति किलो बढ़ गई हैं। जो चीनी पहले 44 से 45 रुपये प्रति किलो बिकती थी, वह अब कई स्थानों पर 64 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गई है। व्यापारियों का कहना है कि यह वृद्धि मिल स्तर से शुरू हुई है।


थोक व्यापारियों के अनुसार, चीनी मिलों में अप्रैल के अंत तक पेराई और उत्पादन का कार्य बंद हो जाता है। इसके बाद अक्टूबर के अंत या नवंबर में नए सत्र के साथ चीनी उत्पादन की प्रक्रिया फिर से शुरू होती है। उत्पादन रुकने के कारण बाजार में उपलब्ध स्टॉक पर दबाव बढ़ गया है, जिसका प्रभाव डिस्ट्रीब्यूटर, थोक विक्रेता और अंततः रिटेल बाजार पर पड़ रहा है। सरकार ने थोक डीलरों के लिए चार हजार क्विंटल तक की स्टॉक लिमिट निर्धारित की है। व्यापारियों के बीच यह चिंता भी है कि मौजूदा स्थिति में चीनी की कालाबाजारी की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।


त्योहारों के मौसम में चीनी की मांग में वृद्धि

रक्षाबंधन के साथ त्योहारों का मौसम शुरू होने वाला है। इस दौरान मिठाइयों, बेकरी उत्पादों और अन्य खाद्य सामग्रियों की मांग में तेजी आती है। ऐसे में चीनी की कीमतों में वृद्धि का सीधा असर इन उत्पादों की लागत और बिक्री कीमतों पर पड़ने की संभावना है।


रेलवे रोड पर बेकरी संचालक एसएस विज का कहना है कि चीनी की कीमतों में वृद्धि के कारण उत्पादों की कीमतें 5 से 10 प्रतिशत बढ़ चुकी हैं। वहीं, शक्ति नगर के हलवाई अश्वनी साहनी ने बताया कि मिठाइयों में चीनी की खपत सबसे अधिक होती है, जिससे दामों में लगभग 10 प्रतिशत की वृद्धि हो चुकी है।


गुड़ की कीमतों में भी वृद्धि

केवल चीनी ही नहीं, गुड़ की कीमतों में भी काफी वृद्धि हुई है। जहां चीनी में 20 रुपये की बढ़ोतरी हुई है, वहीं गुड़ की कीमत में 30 से 40 रुपये का उछाल आया है।


क्या एथेनॉल है इसके पीछे का कारण?

चीनी की बढ़ती कीमतों के पीछे एथेनॉल को जिम्मेदार ठहराने की चर्चा हो रही है, लेकिन थोक व्यापारियों का कहना है कि ऐसा नहीं है। चीनी मिलों में अप्रैल के अंत तक पेराई और उत्पादन का कार्य बंद हो जाता है, जिससे बाजार में स्टॉक पर दबाव बढ़ता है।


जिले में थोक डीलरों की संख्या

जिले में लगभग 25 थोक डीलर हैं, जो प्रतिदिन औसतन तीन हजार क्विंटल चीनी बेचते हैं। इसकी खपत हलवाइयों, होटल, रेस्टोरेंट और घरेलू उपभोक्ताओं में होती है। मंडी फैंटनगंज के चीनी थोक कारोबारी अनिल सोनी के अनुसार, मिलों में नवंबर में गन्ने की पिड़ाई शुरू होगी, जिसके बाद चीनी की उपलब्धता बढ़ने से कीमतों में गिरावट की संभावना है।