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छोटे विक्रेताओं के लिए नई जीएसटी नियमावली: ई-कॉमर्स में पंजीकरण की सुविधा

केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर एवं सीमा शुल्क बोर्ड ने छोटे विक्रेताओं के लिए नई जीएसटी नियमावली जारी की है, जिसके तहत वे बिना भौतिक उपस्थिति के विभिन्न राज्यों में पंजीकरण करा सकेंगे। यह कदम लगभग 9.5 लाख छोटे विक्रेताओं को देशभर के बाजारों में पहुंचने में मदद करेगा। जानें इस नई प्रक्रिया के बारे में और कैसे यह ई-कॉमर्स में कर संबंधी समानता बढ़ाएगा।
 

नई जीएसटी नियमों का प्रभाव

एक नवंबर से, अमेजन और फ्लिपकार्ट जैसे ऑनलाइन प्लेटफार्मों पर छोटे विक्रेता विभिन्न राज्यों में अपने उत्पादों की आपूर्ति के लिए संबंधित गोदाम को अपने कारोबार का मुख्य स्थान (पीपीओबी) घोषित कर सकेंगे। केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर एवं सीमा शुल्क बोर्ड (सीबीआईसी) ने इस संबंध में केंद्रीय जीएसटी नियमों में संशोधन की अधिसूचना जारी की है। इस नए नियम के तहत, यदि छोटे विक्रेताओं का इनपुट टैक्स क्रेडिट हर महीने 2.5 लाख रुपये से कम है, तो वे बिना किसी भौतिक उपस्थिति के किसी अन्य राज्य या केंद्र शासित प्रदेश में पंजीकरण करा सकते हैं।


पंजीकरण की प्रक्रिया

इसके लिए, विक्रेता उस राज्य या केंद्र शासित प्रदेश में ई-कॉमर्स प्लेटफार्म के गोदाम को अपने कारोबार का मुख्य स्थान घोषित कर सकते हैं। हालांकि, विक्रेता को अपने गृह राज्य में भौतिक उपस्थिति बनाए रखनी होगी, जहां उनके परिसर का सत्यापन और आधार प्रमाणीकरण किया जाएगा।


अन्य राज्यों में पंजीकरण के लिए ई-कॉमर्स प्लेटफार्म की सहमति आवश्यक होगी, और इस प्रक्रिया में कर अधिकारियों की कोई भूमिका नहीं होगी। ये बदलाव जीएसटी परिषद की बैठक में आठ अक्टूबर को स्वीकृत किए गए थे और एक नवंबर, 2026 से लागू होंगे।


छोटे विक्रेताओं को लाभ

इस पहल से लगभग 9.5 लाख छोटे विक्रेताओं को बिना भौतिक कार्यालय स्थापित किए देशभर के बाजारों में पहुंचने में मदद मिलेगी। इससे ई-कॉमर्स के विभिन्न कारोबारी मॉडल के बीच कर संबंधी समानता भी बढ़ेगी। छोटे विक्रेताओं को फॉर्म जीएसटी आरईजी-01 में आवेदन करना होगा और अपने स्थायी खाता संख्या (पैन) के साथ माल एवं सेवा कर पहचान संख्या (जीएसटीआईएन) का उल्लेख करना होगा।


आवेदन संबंधित ई-कॉमर्स प्लेटफार्म को सहमति के लिए भेजा जाएगा, और प्लेटफार्म को सात कार्यदिवस के भीतर अपनी सहमति प्रदान करनी होगी। यदि निर्धारित समय में सहमति नहीं मिलती है, तो आवेदन पर आगे कोई कार्रवाई नहीं की जाएगी।


सीबीआईसी की अधिसूचना में कहा गया है कि यदि ई-कॉमर्स प्लेटफार्म किसी पंजीकृत व्यक्ति को दी गई सहमति वापस लेता है, तो उसे साझा पोर्टल पर इसकी सूचना देनी होगी।