जीएसटी दरों में बदलाव का एक साल: ऑटोमोबाइल और रोजमर्रा की वस्तुओं पर प्रभाव
जीएसटी दरों में बदलाव का एक साल
गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स (जीएसटी) में संशोधन को एक वर्ष पूरा हो गया है। इस बदलाव के बाद कई उत्पादों की कीमतों में कमी आई और मांग में वृद्धि हुई, लेकिन बाद में कीमतों में वृद्धि ने इस राहत को काफी हद तक कम कर दिया। खाद्य सामग्री से लेकर उपभोक्ता वस्तुओं और ऑटोमोबाइल तक, कई उत्पादों की कीमतें धीरे-धीरे बढ़ी हैं। जिन क्षेत्रों में जीएसटी की दरें घटाई गई थीं, उनमें ऑटोमोबाइल सेक्टर पर सबसे अधिक प्रभाव पड़ा है.
ऑटोमोबाइल सेक्टर में वृद्धि
ऑटोमोबाइल क्षेत्र में जीएसटी दरों में बदलाव के बाद ग्राहकों को प्रारंभ में कम कीमतों का लाभ मिला, जिससे मांग में तेजी आई। इन्वेस्टमेंट इंफॉर्मेशन एंड क्रेडिट रेटिंग एजेंसी (ICRA) के अनुसार, अगस्त 2026 तक के 11 महीनों में ऑटोमोबाइल की खुदरा बिक्री 2.9 करोड़ यूनिट रही, जो पिछले वर्ष की तुलना में 20 प्रतिशत अधिक है। इस दौरान यात्री वाहनों के रजिस्ट्रेशन में 22 प्रतिशत, दोपहिया वाहनों में 20 प्रतिशत, वाणिज्यिक वाहनों में 19 प्रतिशत और ट्रैक्टरों में 23 प्रतिशत की वृद्धि हुई.
उत्साह में वृद्धि
ICRA के वरिष्ठ उपाध्यक्ष जितिन मक्कर के अनुसार, जीएसटी दरों में बदलाव के बाद पिछले 11-12 महीनों में लोगों का सामान खरीदने का विश्वास और उत्साह बढ़ा है। SIAM के आंकड़ों के अनुसार, पिछले छह महीनों में निर्माताओं के डिस्पैच में भी तेजी देखी गई है। SIAM के डायरेक्टर जनरल राजेश मेनन ने कहा कि मांग का माहौल मजबूत बना हुआ है.
गाड़ियों की कीमतों में बदलाव
गाड़ियों की कीमतों में जीएसटी कटौती के शुरुआती लाभ स्पष्ट हैं, लेकिन इसके बाद कीमतों में गिरावट भी देखी गई है। कई कंपनियों ने जीएसटी दरों में कटौती के बाद गाड़ियों की कीमतें बढ़ा दी हैं। उदाहरण के लिए, मारुति ऑल्टो K10 STD (O) की कीमत 4.2 लाख रुपये से घटकर 3.7 लाख रुपये हो गई, जबकि महिंद्रा स्कॉर्पियो-N Z2 की कीमत 13.9 लाख रुपये से घटकर 13.2 लाख रुपये हुई, लेकिन अब यह 13.6 लाख रुपये हो गई है.
रोजमर्रा की वस्तुओं पर प्रभाव
रोजमर्रा की वस्तुओं पर भी जीएसटी कटौती का प्रभाव देखा गया। कई आवश्यक वस्तुओं पर जीएसटी को 12 प्रतिशत या 18 प्रतिशत से घटाकर 5 प्रतिशत किया गया, जिससे उनकी कीमतें लगभग 10 प्रतिशत तक कम हुईं। लेकिन बाद में कच्चे माल, बिजली और परिवहन लागत में वृद्धि के कारण कंपनियों ने कीमतों में 6-7 प्रतिशत तक वृद्धि की.
भविष्य में कीमतों में वृद्धि?
पारले प्रोडक्ट्स के चीफ मार्केटिंग ऑफिसर मयंक शाह ने कहा कि ग्राहकों को अभी भी 2-3 प्रतिशत का लाभ मिल रहा है। हालांकि, यदि कच्चे माल की कीमतें बढ़ती रहीं, तो कंपनियां दिवाली के आसपास कीमतें बढ़ा सकती हैं. कंज्यूमर सेक्टर एनालिस्ट रोनक शाह के अनुसार, FMCG कंपनियों के लिए जीएसटी कटौती ने मांग में सीधे बड़े उछाल के बजाय वहनीयता को बढ़ावा दिया.
कपड़ा उद्योग पर प्रभाव
कपड़ा क्षेत्र में जीएसटी में बदलाव का प्रभाव सीमित रहा है। 2,500 रुपये से अधिक कीमत वाले कपड़ों पर जीएसटी को 12 प्रतिशत से बढ़ाकर 18 प्रतिशत किया गया है। इसका असर विशेष रूप से फेस्टिव और ऑकेजन वियर पर पड़ा है. क्लोदिंग मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया के चीफ मेंटर राहुल मेहता के अनुसार, जीएसटी 2.0 के सुधारों का कीमतों पर बहुत अधिक प्रभाव नहीं पड़ा है.