जीएसटी पंजीकरण प्रक्रिया को सरल बनाने के लिए नई पहल
जीएसटी परिषद की नई योजना
नई दिल्ली, 5 अक्टूबर: जीएसटी परिषद एक ऐसे प्रस्ताव पर विचार कर रही है, जो व्यापारियों को एक ही आवेदन प्रक्रिया के माध्यम से विभिन्न राज्यों में जीएसटी पंजीकरण के लिए आवेदन करने की अनुमति देगा। इसके साथ ही, कर अधिकारियों द्वारा मांगे जाने वाले दस्तावेजों की एक समान सूची भी तैयार की जा सकती है। व्यापार में आसानी लाने के उद्देश्य से, परिषद की 7 अक्टूबर को होने वाली बैठक में बड़े व्यापारियों के लिए नए और सरल जीएसटी पंजीकरण फॉर्म पर चर्चा की संभावना है।
पंजीकरण प्रक्रिया में सुधार
वर्तमान में, वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) के तहत 1.68 करोड़ से अधिक व्यापारी पंजीकृत हैं। नया पंजीकरण फॉर्म भरना सरल होगा और प्रत्येक चरण में मार्गदर्शन उपलब्ध कराया जाएगा। इसके अलावा, फॉर्म में अपलोड किए जाने वाले दस्तावेजों की सूची भी प्रदान की जाएगी।
स्वचालित जानकारी साझा करना
सूत्रों के अनुसार, नई पंजीकरण व्यवस्था लागू होने के बाद, किसी राज्य में पंजीकरण के लिए दी गई जानकारी अन्य राज्यों में पंजीकरण के लिए स्वतः उपलब्ध हो जाएगी। यदि कोई व्यापारी कई राज्यों में पंजीकरण के लिए आवेदन करता है, तो वह सभी आवेदन एक साथ भर सकेगा। जीएसटी प्रणाली यह निर्धारित करेगी कि किस कार्यालय के पास संबंधित आवेदन का अधिकार क्षेत्र है।
दस्तावेजों की मांग के लिए दिशानिर्देश
परिषद अधिकारियों के लिए दिशानिर्देश भी तैयार कर सकती है, जिसमें बताया जाएगा कि किन दस्तावेजों की मांग की जा सकती है, किस उद्देश्य से और कब उनकी आवश्यकता होगी। इससे जीएसटी पंजीकरण में राज्यों के बीच एकरूपता आएगी।
सरल जीएसटी पंजीकरण योजना
जीएसटी परिषद ने सितंबर 2025 में छोटे और कम जोखिम वाले व्यापारियों के लिए सरल जीएसटी पंजीकरण योजना को मंजूरी दी थी, जो 1 नवंबर, 2025 से लागू होगी। इस योजना के तहत, ऐसे व्यापारियों को तीन दिन के भीतर पंजीकरण दिया जाएगा।
पंजीकरण में बदलाव की प्रक्रिया
सूत्रों ने बताया कि जीएसटी परिषद के समक्ष रखे जाने वाले पंजीकरण संबंधी बदलाव अब अन्य व्यापारियों को भी शामिल करेंगे। एएमआरजी ग्लोबल के प्रबंध साझेदार रजत मोहन ने कहा कि एक ही आवेदन प्रक्रिया के माध्यम से कई राज्यों में जीएसटी पंजीकरण की अनुमति देना पंजीकरण व्यवस्था को सरल बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
बैकएंड प्रौद्योगिकी विश्लेषण
जीएसटी के बैकएंड प्रौद्योगिकी विश्लेषण के अनुसार, जीएसटी पंजीकरण में बदलाव के लिए आने वाले लगभग 66 प्रतिशत आवेदन कंपनी के नाम, निदेशक, साझेदार या कर्ता में बदलाव से संबंधित हैं। पंजीकरण दस्तावेजों में बदलाव के लिए हर साल आने वाले 16 लाख आवेदनों में से करीब 10.5 लाख आवेदन इन क्षेत्रों में बदलाव के लिए होते हैं।