जीएसटी परिषद की बैठक में महत्वपूर्ण बदलाव: रिफंड प्रक्रिया में तेजी और आईटीसी का विस्तार
जीएसटी परिषद की 57वीं बैठक में लिए गए निर्णय
नई दिल्ली - जीएसटी परिषद की 57वीं बैठक में व्यापार में सुगमता बढ़ाने के लिए कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए हैं, जिनमें रिफंड प्रक्रिया को तेज करना और इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) का विस्तार शामिल है।
बैठक में प्रस्तावित रिफंड प्रक्रिया में बदलाव के तहत, अब रिफंड क्लेम स्वीकार करने की अवधि को 15 दिनों से घटाकर 10 दिन कर दिया गया है। यदि इस अवधि में कोई रिफंड क्लेम स्वीकार नहीं होता है और न ही किसी कमी की सूचना दी जाती है, तो इसे स्वीकार किया हुआ माना जाएगा।
इस प्रक्रिया में किसी अधिकारी की आवश्यकता नहीं होगी, क्योंकि सिस्टम रिस्क असेसमेंट के आधार पर क्लेम का 90 प्रतिशत हिस्सा स्वीकृत किया जाएगा। वर्तमान में, रिफंड ऑर्डर मिलने के सात दिनों के भीतर जारी किया जाता है, लेकिन अब इसे तीन कार्यदिवसों के भीतर जारी किया जाएगा। इससे कैश लेजर में मौजूद अतिरिक्त बैलेंस का रिफंड पूरी तरह से स्वचालित हो जाएगा, जिसमें किसी अधिकारी का हस्तक्षेप नहीं होगा। ये बदलाव विशेष रूप से निर्यातकों और 'इनवर्टेड ड्यूटी स्ट्रक्चर' के तहत काम करने वाले व्यवसायों के लिए फायदेमंद हो सकते हैं।
इसके अतिरिक्त, जीएसटी परिषद ने आईटीसी का विस्तार भी किया है। अब कर्मचारियों के लिए हेल्थ और लाइफ इंश्योरेंस, साथ ही फैक्ट्रियों के बाहर स्थापित टेलीकम्युनिकेशन टावर और पाइपलाइन पर भी आईटीसी मिलेगा। फ्री सैंपल और एक्सपायरी के कारण राइट-ऑफ किए गए स्टॉक पर भी आईटीसी मिलेगा, बशर्ते कि कानून के तहत उन सामानों का नष्ट करना आवश्यक हो। इसके अलावा, सरकार ने कुछ बी2बी सेवाओं पर दो बार टैक्स लगने से रोकने के लिए भी कदम उठाए हैं।
एजेंट के माध्यम से बुक की गई 7,500 रुपए प्रति रात तक की होटल बुकिंग, रेस्टोरेंट और कैटरिंग सेवाओं, और पैसेंजर ट्रांसपोर्ट जैसी सेवाओं पर अब केवल एक बार टैक्स लगेगा।