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जीएसटी परिषद ने कर प्रशासन में महत्वपूर्ण सुधारों को मंजूरी दी

जीएसटी परिषद ने हाल ही में कर प्रशासन में महत्वपूर्ण सुधारों को मंजूरी दी है, जिसमें जीएसटी अधिकारियों का गिरफ्तारी का अधिकार समाप्त करना और रिफंड प्रक्रिया को तेज करना शामिल है। छोटे आपूर्तिकर्ताओं के लिए पंजीकरण प्रक्रिया को सरल बनाने के साथ-साथ, परिषद ने स्वास्थ्य और जीवन बीमा पर इनपुट टैक्स क्रेडिट की सिफारिश भी की है। ये सुधार 1 अप्रैल, 2027 से लागू होंगे और इनसे करदाताओं के लिए प्रक्रिया को आसान बनाने की उम्मीद है। जानें और क्या बदलाव होने वाले हैं।
 

जीएसटी परिषद की बैठक में सुधारों की स्वीकृति

नई दिल्ली, 8 अक्टूबर। जीएसटी परिषद ने बृहस्पतिवार को कर प्रशासन में व्यापक सुधारों को मंजूरी दी। इस निर्णय के तहत जीएसटी अधिकारियों को करदाताओं को गिरफ्तार करने का अधिकार समाप्त कर दिया गया है, और आपराधिक अभियोजन की सीमा को बढ़ाकर पांच करोड़ रुपये कर दिया गया है। इसके साथ ही, अधिकांश दावों के लिए तेज रिफंड प्रक्रिया की व्यवस्था की गई है।


छोटे आपूर्तिकर्ताओं के लिए पंजीकरण प्रक्रिया में सुधार

परिषद ने छोटे आपूर्तिकर्ताओं के लिए ई-कॉमर्स प्लेटफार्मों पर पंजीकरण को सरल बनाने का निर्णय लिया है। इसमें जीएसटी पंजीकरण में बदलाव के लिए एक सरल प्रक्रिया, जुर्माने में कमी, और इनपुट टैक्स क्रेडिट के दावों के लिए बिल मिलान व्यवस्था की ओर बढ़ने के लिए अधिकारियों की एक समिति का गठन शामिल है। यह समिति तीन महीने के भीतर अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करेगी।


रिफंड प्रक्रिया में तेजी

समिति वास्तविक खरीदारों को सुरक्षा प्रदान करने के मुद्दे की जांच करेगी, जिनके पास उचित बिल हैं और जिन्होंने अपने आपूर्तिकर्ता को पूरा भुगतान किया है। परिषद ने जीएसटी नोटिस जारी करने के लिए 10,000 रुपये की न्यूनतम सीमा को भी मंजूरी दी है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि जीएसटी 2.0 के तहत प्रक्रिया संबंधी सुधार भरोसे के सिद्धांत पर आधारित हैं।


सुधारों का कार्यान्वयन

ये सुधार 1 अप्रैल, 2027 से लागू होंगे। सीतारमण ने कहा, "कंपनियों और करदाताओं के बीच भरोसा होना चाहिए।" उन्होंने यह भी बताया कि जीएसटी की अगली पीढ़ी के सुधारों में दर और प्रक्रिया से जुड़े 99 प्रतिशत मुद्दों का समाधान किया गया है।


रिफंड आवेदन की प्रक्रिया में बदलाव

सीतारमण ने कहा कि रिफंड आवेदन की प्राप्ति की पुष्टि की अवधि को 15 दिन से घटाकर 10 दिन कर दिया जाएगा। यदि 10 दिन के भीतर न तो प्राप्ति की पुष्टि होती है और न ही कमी संबंधी सूचना जारी की जाती है, तो आवेदन को प्राप्त हुआ माना जाएगा।


करदाताओं के लिए नई व्यवस्था

मंत्री ने बताया कि परिषद ने पांच करोड़ रुपये तक के कारोबार वाले और केवल उपभोक्ताओं को आपूर्ति करने वाले कारोबारियों के लिए वैकल्पिक व्यवस्था को मंजूरी दी है। इसके तहत साल में केवल एक बार रिटर्न दाखिल करना होगा।


कर प्रशासन में बदलाव

ये सुधार अप्रत्यक्ष करों के प्रवर्तन के तरीके में महत्वपूर्ण बदलाव को दर्शाते हैं। गिरफ्तारी का अधिकार समाप्त होना विशेष रूप से महत्वपूर्ण है। यह बदलाव जीएसटी प्रशासन को 'फेसलेस' और प्रौद्योगिकी आधारित बनाने की दिशा में एक कदम है।


स्वास्थ्य और जीवन बीमा पर टैक्स क्रेडिट

परिषद ने कर्मचारियों के लिए स्वास्थ्य और जीवन बीमा पर संबंधित कंपनियों के लिए इनपुट टैक्स क्रेडिट उपलब्ध कराने की सिफारिश की है।


केंद्रीकृत कर प्रशासन की तैयारी

वित्त मंत्री ने कहा कि केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर एवं सीमा शुल्क बोर्ड (सीबीआईसी) केंद्रीय जीएसटी के तहत पंजीकृत और विभिन्न राज्यों में कारोबार करने वाले करीब दो लाख करदाताओं के लिए केंद्रीकृत आकलन व्यवस्था लागू करने की योजना बना रहा है।


राजस्व में वृद्धि

सीतारमण ने कहा कि पिछले साल की गई कर दरों में कटौती के बावजूद राजस्व में कोई कमी नहीं आई है। कर संग्रह लगातार बढ़ा है।