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जेड एंटरटेनमेंट ने सेबी के आदेश के खिलाफ अपील की, सुनवाई बुधवार को

जेड एंटरटेनमेंट एंटरप्राइजेज लिमिटेड ने भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड के आदेश के खिलाफ अपील की है, जिसमें कंपनी को प्रतिभूति बाजार से दो महीने के लिए बाहर रखा गया है। पुनीत गोयनका और सुभाष चंद्रा पर भी रोक लगाई गई है। मामले की सुनवाई बुधवार को होगी, जिसमें कंपनी अंतरिम राहत की मांग कर सकती है। यह मामला हैदराबाद में स्थित एक संपत्ति से जुड़ा है, जिसका उपयोग एस्सेल समूह की कंपनियों द्वारा कर्ज के लिए सुरक्षा के रूप में किया गया था। सभी की नजर अब इस सुनवाई पर है।
 

जेड एंटरटेनमेंट की कानूनी लड़ाई

जेड एंटरटेनमेंट एंटरप्राइजेज लिमिटेड और इसके सीईओ पुनीत गोयनका ने भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) के आदेश को चुनौती देने के लिए प्रतिभूति अपीलीय न्यायाधिकरण का रुख किया है। दोनों ने बाजार में प्रवेश पर लगाए गए प्रतिबंध को चुनौती दी है। कंपनी ने तात्कालिक सुनवाई और अंतरिम राहत की मांग की, जिसके बाद न्यायाधिकरण ने बुधवार को सुनवाई निर्धारित की है.


सुनवाई की जानकारी

हाल की जानकारी के अनुसार, सोमवार को प्रतिभूति अपीलीय न्यायाधिकरण में मामले की सुनवाई हुई। जेड एंटरटेनमेंट के वकील ने तात्कालिक सुनवाई का अनुरोध करते हुए बताया कि कंपनी को दो महीने के लिए प्रतिभूति बाजार से बाहर रखा गया है। इसके बाद न्यायाधिकरण ने मामले को बुधवार के लिए सूचीबद्ध कर दिया है.


सेबी का आदेश

यह ध्यान देने योग्य है कि सेबी ने 31 जुलाई को एक आदेश जारी किया था, जिसमें जेड एंटरटेनमेंट को दो महीने तक प्रतिभूति बाजार में कारोबार करने से रोका गया था। इसके अलावा, पुनीत गोयनका और प्रवर्तक सुभाष चंद्रा पर 12-12 महीने की रोक लगाई गई है। नियामक ने कंपनी पर 30 लाख रुपये, गोयनका पर 58 लाख रुपये और चंद्रा पर 60 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया है, जिसे 45 दिनों के भीतर जमा करने का निर्देश दिया गया है.


संपत्ति से जुड़ा मामला

यह मामला हैदराबाद के जुबली हिल्स में स्थित जेड एंटरटेनमेंट की एक संपत्ति से संबंधित है। नियामक के अनुसार, इस संपत्ति का उपयोग एस्सेल समूह की चार कंपनियों द्वारा लिए गए कर्ज के लिए सुरक्षा के रूप में किया गया था, जिसमें इंडियाबुल्स हाउसिंग फाइनेंस लिमिटेड से लगभग 726 करोड़ रुपये का कर्ज शामिल है.


लेनदेन की जांच

सेबी के निष्कर्षों के अनुसार, संपत्ति के मालिकाना हक से संबंधित दस्तावेज 27 दिसंबर 2018 को जमा किए गए थे। बाद में, 225 करोड़ रुपये के कर्ज भुगतान के बाद, एक जून 2020 को इन दस्तावेजों को वापस किया गया। नियामक ने इस लेनदेन के लिए कंपनी की मंजूरियों और जानकारी सार्वजनिक करने के तरीके पर सवाल उठाए हैं.


आवश्यक मंजूरी की कमी

सेबी ने यह भी कहा कि कंपनी की लेखा समिति, निदेशक मंडल और शेयरधारकों से आवश्यक मंजूरी नहीं ली गई थी। इसके अलावा, संपत्ति के उपयोग, संबंधित पक्षों से जुड़े लेनदेन और संभावित देनदारी से संबंधित जानकारी को सार्वजनिक नहीं किया गया है.


दिल्ली उच्च न्यायालय में मामला

दिल्ली उच्च न्यायालय में चल रहे मुकदमे, संपत्ति को बेचने या हस्तांतरित नहीं करने से जुड़े वचन और बाद में संपत्ति के दस्तावेज जारी करने से संबंधित जानकारी भी जांच का हिस्सा रही है.


सुनवाई की प्रतीक्षा

जेड एंटरटेनमेंट और उसके प्रवर्तकों को सेबी के आदेश के खिलाफ कानूनी राहत प्राप्त करने का अवसर मिला है। बुधवार की सुनवाई में कंपनी बाजार में कारोबार पर लगी रोक को अंतरिम रूप से हटाने या राहत देने की मांग कर सकती है.


महत्वपूर्ण समय

इस मामले का समय भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। सेबी का आदेश उसी दिन आया था, जब जेड एंटरटेनमेंट के शेयरधारकों ने असाधारण आम बैठक में कंपनी की प्रस्तावित योजना को मंजूरी दी थी। शेयरधारकों की मंजूरी से कंपनी की आगे की रणनीति को लेकर सकारात्मक उम्मीदें थीं, लेकिन उसी दिन नियामकीय कार्रवाई ने कंपनी के लिए नई चुनौतियाँ खड़ी कर दी हैं. अब सभी की नजर बुधवार को होने वाली सुनवाई पर है.