टाटा ट्रस्ट का टाटा संस के पुनर्गठन का प्रस्ताव: एनबीएफसी और सीआईसी से बाहर लाने की योजना
टाटा ट्रस्ट का पुनर्गठन प्रस्ताव
टाटा ट्रस्ट ने सोमवार को टाटा संस के पुनर्गठन का एक प्रस्ताव पेश किया है, जिसका उद्देश्य इसे गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनी (एनबीएफसी) और प्रमुख निवेश कंपनी (सीआईसी) के नियामकीय दायरे से बाहर लाना है। इस योजना के तहत, समूह की दो कंपनियों का विलय टाटा संस में किया जाएगा, जिससे इसे एक गैर-सूचीबद्ध निजी कंपनी के रूप में बनाए रखा जा सके। ट्रस्ट ने एक बयान में बताया कि टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स सिस्टम्स सॉल्यूशंस (टीईएसएस) और टाटा कंसल्टिंग इंजीनियर्स (टीसीई) का विलय टाटा संस में प्रस्तावित है।
विलय की प्रक्रिया और आरबीआई की मंजूरी
टाटा ट्रस्ट ने टाटा संस के निदेशक मंडल से इस पुनर्गठन प्रस्ताव पर विचार करने और आवश्यक कदम उठाने का अनुरोध किया है। इसमें भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) से पहले अनापत्ति प्रमाणपत्र प्राप्त करना भी शामिल है। टाटा ट्रस्ट ने यह स्पष्ट किया है कि वह टाटा संस को शेयर बाजार में सूचीबद्ध करने के खिलाफ है और इस पुनर्गठन का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि पुनर्गठित टाटा संस एनबीएफसी और सीआईसी के नियामकीय मानदंडों को पूरा न करे।
टाटा ट्रस्ट और टाटा संस के बीच मतभेद
यह प्रस्ताव टाटा संस के निदेशक मंडल और टाटा ट्रस्ट के बीच कंपनी के स्वामित्व ढांचे को लेकर बढ़ते मतभेदों के बीच आया है। नोएल टाटा की अध्यक्षता वाले ट्रस्ट ने टाटा संस को शेयर बाजार में सूचीबद्ध करने का विरोध किया है। जुलाई 2025 में, दोनों प्रमुख टाटा ट्रस्ट ने कंपनी को गैर-सूचीबद्ध निजी इकाई बनाए रखने के प्रयास करने का प्रस्ताव सर्वसम्मति से पारित किया था।
आरबीआई की वर्गीकरण और विवाद
आरबीआई द्वारा 2022 में टाटा संस को अपर लेयर एनबीएफसी के रूप में वर्गीकृत किए जाने के बाद सूचीबद्धता का मुद्दा महत्वपूर्ण हो गया। टाटा संस ने इस दर्जे से बाहर निकलने का अनुरोध किया था, जिसे आरबीआई ने सितंबर में खारिज कर दिया। हाल ही में टाटा संस के निदेशक मंडल की बैठक में कंपनी को शेयर बाजार में सूचीबद्धता की दिशा में आगे बढ़ने का निर्णय लिया गया, जिससे टाटा ट्रस्ट के साथ विवाद और बढ़ गया है।
कानूनी राय और वित्तीय आंकड़े
इस मामले में कानूनी राय भी ली जा रही है। टाटा ट्रस्ट के प्रस्ताव के अनुसार, दोनों कंपनियों के टाटा संस में विलय से बनी इकाई की परिचालन आय 31 मार्च, 2026 तक 1,05,043 करोड़ रुपये होने की उम्मीद है, जो उसकी कुल आय का 64.3 प्रतिशत होगी। इसके मुकाबले वित्तीय परिसंपत्तियों से आय 40,072 करोड़ रुपये होगी।
पुनर्गठन के बाद की स्थिति
इस पुनर्गठित इकाई के पास 2,00,158 करोड़ रुपये की शुद्ध परिसंपत्तियां होंगी। इसमें समूह की कंपनियों में निवेश 1,77,120 करोड़ रुपये होगा, जो कुल शुद्ध परिसंपत्तियों का 90 प्रतिशत से कम होगा। टाटा ट्रस्ट का कहना है कि इससे पुनर्गठित टाटा संस एनबीएफसी के मुख्य कारोबार संबंधी मानदंड और सीआईसी के लिए लागू शर्तों को पूरा नहीं करेगी।
विलय की प्रक्रिया और आरबीआई की मंजूरी
टाटा ट्रस्ट ने कहा कि प्रस्तावित विलय से टाटा संस में परिचालन कारोबार और टाटा समूह की कंपनियों में निवेश, दोनों को रखने वाली उसकी पुरानी व्यवस्था फिर से स्थापित होगी। टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (टीसीएस) भी 2004 में अलग कंपनी बनाए जाने से पहले टाटा संस का हिस्सा थी। प्रस्तावित विलय को आरबीआई के 2025 के एनबीएफसी स्वैच्छिक विलय संबंधी दिशा-निर्देशों का पालन करना होगा। इसमें केंद्रीय बैंक से पहले अनापत्ति प्रमाणपत्र लेना भी शामिल है। टाटा ट्रस्ट ने कहा कि पुनर्गठन पूरा होने के बाद टाटा संस सीआईसी के रूप में अपना पंजीकरण प्रमाणपत्र आरबीआई को सौंप देगी। प्रस्ताव पर अभी टाटा संस के निदेशक मंडल को विचार करना है। इसके अलावा आरबीआई की मंजूरी और विलय की प्रक्रिया पूरी होना भी आवश्यक है।