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टाटा संस ने एन चंद्रशेखरन को कार्यकारी चेयरमैन के रूप में पुनर्नियुक्त किया

टाटा संस के निदेशक मंडल ने एन चंद्रशेखरन को कार्यकारी चेयरमैन के रूप में पुनर्नियुक्त किया है, जबकि टाटा ट्रस्ट ने इस निर्णय पर आपत्ति जताई है। कंपनी ने शेयर बाजार में सूचीबद्ध होने की दिशा में कदम उठाने का भी निर्णय लिया है। जानें इस महत्वपूर्ण बैठक और इसके परिणामों के बारे में।
 

टाटा संस का निदेशक मंडल महत्वपूर्ण निर्णय लेता है

टाटा संस के निदेशक मंडल ने हाल ही में एन चंद्रशेखरन को कार्यकारी चेयरमैन के रूप में पांच साल के नए कार्यकाल के लिए पुनर्नियुक्त करने का निर्णय लिया। इसके साथ ही, कंपनी ने शेयर बाजार में सूचीबद्ध होने की प्रक्रिया शुरू करने का भी निर्णय लिया। हालांकि, टाटा ट्रस्ट, जो टाटा संस में प्रमुख हिस्सेदारी रखता है, ने चंद्रशेखरन की पुनर्नियुक्ति पर आपत्ति जताते हुए इसे 'अवैध' करार दिया। यह निर्णय बॉम्बे हाउस में निदेशक मंडल की लगभग तीन घंटे की बैठक में लिया गया।


चंद्रशेखरन की पुनर्नियुक्ति पर विवाद

यह बैठक चंद्रशेखरन द्वारा अगस्त में निदेशक मंडल को सूचित करने के कुछ सप्ताह बाद हुई थी कि वह 20 फरवरी, 2027 को अपने मौजूदा कार्यकाल के समाप्त होने के बाद पुनर्नियुक्ति नहीं चाहते। टाटा संस ने एक बयान में कहा कि निदेशक मंडल की 17 सितंबर, 2026 को हुई बैठक में चंद्रशेखरन ने अपने फैसले पर पुनर्विचार करने पर सहमति जताई। इसके बाद, बोर्ड ने उन्हें कार्यकारी चेयरमैन के रूप में पुनर्नियुक्त करने का निर्णय लिया।


आरबीआई के दिशानिर्देशों का पालन

निदेशक मंडल ने भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के दिशानिर्देशों का पालन करने की दिशा में कदम उठाने का निर्णय लिया। कंपनी ने कहा कि वह अनुपालन संबंधी शर्तों पर आरबीआई, टाटा ट्रस्ट और अन्य हितधारकों से मार्गदर्शन प्राप्त करेगी। इन दोनों निर्णयों को टाटा संस की आगामी सालाना आम बैठक में मंजूरी लेनी होगी।


टाटा ट्रस्ट का विरोध

टाटा ट्रस्ट के चेयरमैन नोएल एन टाटा ने चंद्रशेखरन की पुनर्नियुक्ति का विरोध किया। ट्रस्ट ने कहा कि चंद्रशेखरन को पुनर्नियुक्त करने का प्रस्ताव 'अवैध' है और चयन समिति को कंपनी के अंतर्नियमों के अनुसार अपनी प्रक्रिया को आगे बढ़ाना चाहिए। सूत्रों के अनुसार, नोएल टाटा ने चंद्रशेखरन की पुनर्नियुक्ति के खिलाफ मतदान किया, लेकिन प्रस्ताव को बोर्ड में बहुमत से पारित कर दिया गया।


कंपनी की सूचीबद्धता की संभावनाएं

यह निर्णय तब आया जब आरबीआई ने टाटा संस की गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनी (एनबीएफसी) के रूप में पंजीकरण समाप्त करने की अर्जी को खारिज कर दिया। इससे कंपनी की शेयर बाजार में सूचीबद्धता की संभावनाएं फिर से बढ़ गई हैं। टाटा संस पिछले एक साल से बाजार में सूचीबद्धता से बचने के प्रयास कर रही थी और इस दौरान 21,000 करोड़ रुपये से अधिक का कर्ज चुका चुकी है।


निवेशकों का विश्वास

सूत्रों के अनुसार, बोर्ड के सदस्यों का मानना है कि सूचीबद्धता की प्रक्रिया शुरू होने से पहले नेतृत्व में निरंतरता संभावित निवेशकों को भरोसा देगी। आमतौर पर आईपीओ प्रक्रिया शुरू होने पर संभावित निवेशक प्रबंधन की निरंतरता को लेकर आश्वासन चाहते हैं।


चंद्रशेखरन का नेतृत्व

चंद्रशेखरन ने फरवरी 2017 से टाटा संस का नेतृत्व किया है। उन्होंने साइरस मिस्त्री को हटाए जाने के बाद रतन टाटा की जगह ली थी। 2022 में उन्हें सर्वसम्मति से पांच साल के दूसरे कार्यकाल के लिए पुनर्नियुक्त किया गया था।


टाटा ट्रस्ट के भीतर मतभेद

टाटा ट्रस्ट के भीतर भी मतभेद उभरकर सामने आए हैं। सूत्रों के अनुसार, सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट ने नामित निदेशक वेणु श्रीनिवासन को सूचीबद्धता के खिलाफ मतदान करने के लिए बाध्य करने की कोशिश की थी, लेकिन उन्होंने ऐसा करने से इनकार कर दिया।


भविष्य की संभावनाएं

टाटा संस की संभावित सूचीबद्धता भारत के सबसे बड़े आईपीओ में शामिल हो सकती है। एक प्रतिशत हिस्सेदारी की बिक्री से अनुमानित 15,000-20,000 करोड़ रुपये मिल सकते हैं, जिससे समूह का मूल्यांकन लगभग 20 लाख करोड़ रुपये (लगभग 230 अरब डॉलर) हो सकता है।