टाटा संस में चंद्रशेखरन की पुनर्नियुक्ति पर विवाद और सूचीबद्धता की दिशा में कदम
चंद्रशेखरन की पुनर्नियुक्ति पर टाटा ट्रस्ट की आपत्ति
टाटा संस के निदेशक मंडल ने हाल ही में एन. चंद्रशेखरन को कार्यकारी चेयरमैन के रूप में एक और कार्यकाल के लिए पुनर्नियुक्त करने का निर्णय लिया है। इसके साथ ही, कंपनी को शेयर बाजार में सूचीबद्ध करने की प्रक्रिया भी शुरू करने का फैसला किया गया है। हालांकि, टाटा ट्रस्ट, जो टाटा संस में प्रमुख हिस्सेदारी रखता है, ने इस पुनर्नियुक्ति के प्रस्ताव पर आपत्ति जताते हुए मतदान को 'अमान्य' करार दिया। निदेशक मंडल की तीन घंटे लंबी बैठक के बाद दोनों पक्षों ने अपने-अपने बयान जारी किए।
मतदान में मतभेद और कानूनी राय
चंद्रशेखरन की पुनर्नियुक्ति के लिए मतदान में भी मतभेद सामने आए। टाटा ट्रस्ट ने पूर्व प्रधान न्यायाधीश डी वाई चंद्रचूड़ की कानूनी राय का हवाला देते हुए कहा कि यह मतदान कानूनी रूप से मान्य नहीं था। पिछले महीने, चंद्रशेखरन ने स्पष्ट किया था कि वह 20 फरवरी, 2027 को अपने मौजूदा कार्यकाल के समाप्त होने के बाद एक और कार्यकाल नहीं लेना चाहते।
आरबीआई के निर्णय के बाद स्थिति में बदलाव
हालांकि, भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) द्वारा टाटा संस के शेयर बाजार में सूचीबद्ध होने से संबंधित प्रयासों को खारिज करने के बाद स्थिति में बदलाव आया। टाटा संस ने एक बयान में कहा कि चंद्रशेखरन ने 'बोर्ड के अनुरोध पर अपने फैसले पर पुनर्विचार करने पर सहमति जताई' और इसके बाद निदेशक मंडल ने बहुमत से उन्हें पांच साल के लिए कार्यकारी चेयरमैन नियुक्त करने का निर्णय लिया।
टाटा ट्रस्ट की आपत्ति और कानूनी स्थिति
चार निदेशकों ने प्रस्ताव के पक्ष में मतदान किया, जबकि टाटा ट्रस्ट के चेयरमैन नोएल टाटा ने इसके खिलाफ मतदान किया। बोर्ड ने कहा कि वह आरबीआई के दिशानिर्देशों का पालन करेगा और इस संबंध में नियामक तथा टाटा ट्रस्ट के साथ विचार-विमर्श करेगा। टाटा ट्रस्ट ने कहा कि चंद्रशेखरन का पद छोड़ने का निर्णय पहले ही विधिवत स्वीकार किया जा चुका था।
भविष्य की योजना और संभावित सूचीबद्धता
टाटा ट्रस्ट ने उत्तराधिकारी चुनने के लिए चयन समिति के गठन का निर्देश भी दिया था। ट्रस्ट ने कहा कि चेयरमैन की नियुक्ति से संबंधित प्रस्ताव के लिए ट्रस्ट द्वारा नामित दोनों निदेशकों का पक्ष में मतदान करना आवश्यक है। यदि नोएल टाटा ने प्रस्ताव का विरोध किया, तो मतदान 'कानूनी रूप से अमान्य' हो जाता है। टाटा ट्रस्ट ने कहा कि आरबीआई ने 2022 में टाटा संस को 'अपर लेयर' गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनी के रूप में वर्गीकृत किया था, जिसके तहत कंपनी को तीन साल के भीतर सूचीबद्ध होना था।
कंपनी की वित्तीय स्थिति
कंपनी ने 21,000 करोड़ रुपये से अधिक का कर्ज चुकाने के बाद अपना पंजीकरण रद्द करने का आवेदन किया था, जिसे आरबीआई ने खारिज कर दिया। हालांकि, किसी भी पक्ष ने कानूनी कार्रवाई शुरू करने की जानकारी नहीं दी है। चंद्रशेखरन की नियुक्ति को कंपनी की वार्षिक आम बैठक से मंजूरी मिलनी आवश्यक है, और मामला अदालत में भी जा सकता है। संभावित सूचीबद्धता टाटा संस को भारत के सबसे बड़े सार्वजनिक निर्गमों में शामिल कर सकती है, जिससे टाटा समूह का मूल्यांकन लगभग 230 अरब डॉलर हो सकता है।