टाटा सन्स में एन. चंद्रशेखरन का नया कार्यकाल: नेतृत्व में बदलाव
टाटा सन्स में नेतृत्व परिवर्तन
टाटा समूह की होल्डिंग कंपनी टाटा सन्स में नेतृत्व में महत्वपूर्ण बदलाव हुआ है। बोर्ड ने एन. चंद्रशेखरन को अगले पांच वर्षों के लिए फिर से नियुक्त करने का निर्णय लिया है। इससे यह सुनिश्चित हो गया है कि उनका कार्यकाल फरवरी 2027 के बाद भी जारी रहेगा।
चंद्रशेखरन ने पहले किया था छोड़ने का ऐलान
12 अगस्त को एन. चंद्रशेखरन ने टाटा सन्स के बोर्ड को सूचित किया था कि वह 20 फरवरी 2027 को अपने मौजूदा कार्यकाल के समाप्त होने के बाद फिर से नामांकन नहीं करेंगे। इसके बाद उत्तराधिकारी की खोज शुरू करने की प्रक्रिया भी शुरू हुई थी। फरवरी 2026 में उनके अगले कार्यकाल पर चर्चा नहीं हो पाई थी, क्योंकि बोर्ड में इस पर सहमति नहीं बन पाई थी।
बोर्ड ने चंद्रशेखरन के नाम पर फिर से सहमति जताई
हाल ही में, टाटा सन्स के बोर्ड ने एन. चंद्रशेखरन को पांच साल के नए कार्यकाल के लिए मंजूरी दे दी है। रिपोर्टों के अनुसार, सभी बोर्ड सदस्यों ने इस प्रस्ताव का समर्थन किया, जबकि टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन नोएल टाटा ने इसके खिलाफ वोट दिया। इस निर्णय ने चंद्रशेखरन के कार्यकाल को आगे बढ़ाने का मार्ग प्रशस्त किया है, लेकिन उनके पहले के निर्णय में बदलाव का कारण अभी तक स्पष्ट नहीं हुआ है।
आरबीआई के निर्णय से बदला माहौल
यह घटनाक्रम उस समय हुआ है जब भारतीय रिजर्व बैंक ने टाटा सन्स की कोर इन्वेस्टमेंट कंपनी के रूप में रजिस्ट्रेशन छोड़ने की अर्जी को खारिज कर दिया है। टाटा सन्स ने मार्च 2024 में नियामकीय ढांचे से बाहर निकलने का प्रयास किया था। आरबीआई के निर्णय के बाद, कंपनी पर लागू NBFC नियमों के तहत संभावित शेयर बाजार लिस्टिंग का मुद्दा फिर से चर्चा में आ गया है।
चंद्रशेखरन के सामने चुनौतियाँ
एन. चंद्रशेखरन 2017 में पहली बार टाटा सन्स के चेयरमैन बने थे और 2022 में उन्हें दूसरा कार्यकाल मिला था। अब नए कार्यकाल के साथ, वह 2032 तक कंपनी का नेतृत्व कर सकते हैं। हालांकि, टाटा सन्स की संभावित लिस्टिंग, नियामकीय स्थिति और प्रमुख शेयरधारकों के बीच मतभेद जैसे मुद्दे अभी भी महत्वपूर्ण बने हुए हैं। टाटा ट्रस्ट्स के पास लगभग 66 प्रतिशत हिस्सेदारी है, जबकि शापूरजी पलोनजी समूह के पास लगभग 18 प्रतिशत हिस्सेदारी है।