टाटा समूह के नए चेयरमैन की खोज शुरू, एन. चंद्रशेखरन ने नहीं लिया दोबारा नामांकन
टाटा समूह के मौजूदा चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन ने फरवरी 2027 में अपने कार्यकाल की समाप्ति के बाद दोबारा नामांकन न करने का निर्णय लिया है। इस निर्णय के बाद, टाटा ट्रस्ट्स ने नए चेयरमैन के चयन की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने की तैयारी शुरू कर दी है। नोएल टाटा की भूमिका इस प्रक्रिया में महत्वपूर्ण है, जबकि कानूनी अड़चनें भी सामने आ रही हैं। चयन समिति के गठन और संभावित नामों पर चर्चा टाटा समूह के भविष्य के लिए महत्वपूर्ण होगी।
Aug 14, 2026, 20:44 IST
टाटा समूह के चेयरमैन की नियुक्ति प्रक्रिया में बदलाव
टाटा समूह के अगले चेयरमैन की खोज का रास्ता अब साफ हो गया है। मौजूदा चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन ने फरवरी 2027 में अपने कार्यकाल की समाप्ति के बाद दोबारा नामांकन न करने का निर्णय लिया है। इस निर्णय के बाद, टाटा ट्रस्ट्स ने नए चेयरमैन के चयन की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने की तैयारी शुरू कर दी है।
टाटा ट्रस्ट्स का बयान
गुरुवार को जारी एक बयान में, टाटा ट्रस्ट्स ने चंद्रशेखरन के दोबारा नियुक्ति की पेशकश न करने के निर्णय का सम्मान किया है। टाटा ट्रस्ट्स के पास टाटा संस में 51.4 प्रतिशत से अधिक हिस्सेदारी है, जिससे नए चेयरमैन के चयन में उनकी भूमिका महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
नोएल टाटा की भूमिका
इस प्रक्रिया में नोएल टाटा का नाम प्रमुखता से उभरा है। नोएल टाटा टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन हैं और टाटा संस के बोर्ड में ट्रस्ट्स द्वारा नामित दो निदेशकों में से एक हैं। हाल ही में सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट की बैठक भी नोएल टाटा की अध्यक्षता में हुई, जिसमें अन्य न्यासियों ने भी भाग लिया।
चयन समिति का गठन
बैठक में सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट ने चयन समिति के गठन की प्रक्रिया को जल्द शुरू करने का प्रस्ताव पारित किया। यह समिति नए चेयरमैन के नाम की सिफारिश करेगी। सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट के पास टाटा संस में 27.9 प्रतिशत हिस्सेदारी है, जो इसे कंपनी का सबसे बड़ा शेयरधारक बनाती है।
कानूनी अड़चनें
हालांकि, नए चेयरमैन की नियुक्ति में एक कानूनी अड़चन भी है। सर रतन टाटा ट्रस्ट के पास टाटा संस में 23.5 प्रतिशत हिस्सेदारी है, लेकिन महाराष्ट्र के सार्वजनिक न्यास नियामक द्वारा लगाए गए रोक के कारण इस ट्रस्ट की बैठक नहीं हो पा रही है। इस स्थिति में चयन प्रक्रिया में बाधा आ रही है।
समिति के सदस्यों का चयन
प्रस्तावित समिति में तीन सदस्यों का चयन दोनों ट्रस्ट मिलकर करेंगे। यह जरूरी नहीं कि ये सदस्य टाटा संस के बोर्ड में ट्रस्टों के नामित निदेशक हों। बाकी दो सदस्यों का चयन टाटा संस का बोर्ड करेगा, जिसमें एक मौजूदा बोर्ड सदस्य और एक स्वतंत्र बाहरी व्यक्ति शामिल होगा।
समिति की बैठक की आवश्यकता
वर्तमान में, समिति की बैठक के लिए दोनों ट्रस्टों के नामित सदस्यों की पर्याप्त उपस्थिति आवश्यक है। सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट ने प्रक्रिया शुरू कर दी है, लेकिन सर रतन टाटा ट्रस्ट पर लगी रोक हटने के बिना अगले कदम उठाना मुश्किल हो सकता है। जानकारी के अनुसार, सर रतन टाटा ट्रस्ट ने महाराष्ट्र के चैरिटी आयुक्त से रोक हटाने का अनुरोध किया है।
चंद्रशेखरन का निर्णय
एन. चंद्रशेखरन ने 12 अगस्त को नोएल टाटा और टाटा संस के उपाध्यक्ष वेंु श्रीनिवासन को ईमेल के माध्यम से अपने निर्णय की जानकारी दी थी। उन्होंने बताया कि 20 फरवरी 2027 को मौजूदा कार्यकाल समाप्त होने के बाद वह चेयरमैन पद के लिए दोबारा नामांकन नहीं करेंगे।
चंद्रशेखरन का योगदान
चंद्रशेखरन ने लगभग चार दशकों से टाटा समूह के साथ जुड़े रहने के दौरान कई महत्वपूर्ण बदलाव देखे हैं। हालांकि, हाल के समय में उनके और नोएल टाटा के बीच कारोबारी नीतियों को लेकर मतभेद की खबरें भी आई हैं, जिन्हें उनके पद छोड़ने के निर्णय से जोड़ा जा रहा है।
भविष्य की दिशा
चंद्रशेखरन ने 2017 में टाटा संस की कमान संभाली थी। उनके पहले साइरस मिस्त्री चेयरमैन थे, जिन्हें 2016 में पद से हटाया गया था। अब, लगभग एक दशक बाद, टाटा समूह में नेतृत्व परिवर्तन की प्रक्रिया फिर से शुरू हो रही है। टाटा ट्रस्ट्स ने कहा है कि उनका लक्ष्य नेतृत्व का बदलाव समय पर और व्यवस्थित तरीके से करना है। अगले कुछ महीनों में चयन समिति के गठन और संभावित नामों पर चर्चा टाटा समूह के भविष्य के लिए महत्वपूर्ण होगी।