टाटा समूह में नेतृत्व विवाद: चंद्रशेखरन की पुनर्नियुक्ति पर कानूनी सवाल
टाटा समूह में नेतृत्व का संकट
टाटा समूह में एक बार फिर से नेतृत्व और कंपनी की दिशा को लेकर गंभीर प्रश्न उठ खड़े हुए हैं। टाटा संस के निदेशक मंडल ने एन. चंद्रशेखरन को लगातार तीसरी बार पांच साल के लिए अध्यक्ष बनाए रखने का निर्णय लिया है, लेकिन इस निर्णय के तुरंत बाद उनकी पुनर्नियुक्ति पर कानूनी विवाद उत्पन्न हो गया है। इसका कारण टाटा ट्रस्ट्स के दो नामित निदेशकों के बीच मतभेद है।
मतदान में मतभेद
गुरुवार को हुई बैठक में, टाटा ट्रस्ट्स के अध्यक्ष नोएल टाटा ने चंद्रशेखरन की पुनर्नियुक्ति के खिलाफ वोट दिया, जबकि दूसरे निदेशक वेणु श्रीनिवासन ने उनके पक्ष में मतदान किया। इस कारण मतदान बराबरी पर पहुंच गया। इसके बाद, स्वतंत्र निदेशक हरीश मनवानी ने अपने निर्णायक मत का उपयोग करते हुए चंद्रशेखरन की पुनर्नियुक्ति के प्रस्ताव को मंजूरी दी। रिपोर्टों के अनुसार, इसके बाद कुल मतदान चंद्रशेखरन के पक्ष में चला गया।
कानूनी राय का महत्व
यहां से मामला जटिल हो गया है। टाटा ट्रस्ट्स ने पूर्व प्रधान न्यायाधीश डी. वाई. चंद्रचूड़ से कानूनी सलाह ली थी। टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, चंद्रचूड़ की राय में, टाटा ट्रस्ट्स द्वारा नामित निदेशकों का बहुमत अध्यक्ष की नियुक्ति के लिए आवश्यक है। इस राय के अनुसार, बैठक की अध्यक्षता कर रहे निदेशक का निर्णायक मत इस शर्त को पूरा नहीं कर सकता।
टाटा संस की संरचना
यह समझना आवश्यक है कि चंद्रचूड़ की राय अदालत का निर्णय नहीं है, बल्कि यह टाटा ट्रस्ट्स की कानूनी राय है। इसलिए, इससे चंद्रशेखरन की नियुक्ति अपने आप रद्द नहीं होती। लेकिन इस राय के आधार पर, टाटा ट्रस्ट्स यह सवाल उठा सकता है कि निदेशक मंडल का प्रस्ताव कंपनी के नियमों के अनुसार था या नहीं। टाटा संस की हिस्सेदारी का ढांचा सामान्य कंपनियों से भिन्न है, जहां टाटा ट्रस्ट्स और उनसे जुड़े ट्रस्ट मिलकर लगभग 66 प्रतिशत हिस्सेदारी रखते हैं।
भविष्य की चुनौतियाँ
चंद्रशेखरन की पुनर्नियुक्ति का मामला अचानक नहीं आया है। हाल के समय में टाटा संस के नेतृत्व और भविष्य को लेकर चर्चाएँ चल रही थीं। अगस्त में, चंद्रशेखरन ने अपने मौजूदा कार्यकाल के बाद नया कार्यकाल नहीं लेने की इच्छा जताई थी। वर्तमान कार्यकाल फरवरी 2027 में समाप्त होना था। इसके बाद निदेशक मंडल ने उन्हें एक और कार्यकाल देने का निर्णय लिया।
शेयर बाजार में सूचीबद्धता का मुद्दा
इस विवाद का एक अन्य महत्वपूर्ण पहलू टाटा संस को शेयर बाजार में सूचीबद्ध करने का सवाल है। मार्च 2024 में, निदेशक मंडल ने कंपनी को गैर-लिस्टेड रखने का निर्णय लिया था। इसके बाद, कंपनी ने भारतीय रिजर्व बैंक से अपने पंजीकरण प्रमाणपत्र को वापस लेने का अनुरोध किया था। भारतीय रिजर्व बैंक ने इस अनुरोध को अस्वीकार कर दिया और कंपनी को नियमों का पालन करने के लिए कहा।
नए प्रस्ताव और संभावनाएँ
इस बैठक में शापूरजी पालोनजी समूह द्वारा लगभग 25 हजार करोड़ रुपये जुटाने का प्रस्ताव भी रखा गया। इसके तहत, शापूरजी पालोनजी समूह की दो निवेश कंपनियों के पास मौजूद टाटा संस की कुछ हिस्सेदारी बेचकर धन जुटाने की योजना है। यह प्रस्ताव अभी निदेशक मंडल के सामने है और इसे मंजूरी मिलना बाकी है।
निष्कर्ष
इस प्रकार, टाटा संस के सामने कई जुड़े हुए सवाल हैं। चंद्रशेखरन की पुनर्नियुक्ति का प्रस्ताव निदेशक मंडल में पारित हो चुका है, लेकिन यह प्रक्रिया अंतिम रूप से पूरी होगी या नहीं, यह कंपनी के नियमों और लागू कानून पर निर्भर करेगा। इस कारण, चंद्रशेखरन के तीसरे कार्यकाल को लेकर विवाद अभी समाप्त नहीं हुआ है।