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ट्रंप का नया आदेश: विदेशी दवाओं पर 100% तक टैरिफ लगाने की योजना

डोनाल्ड ट्रंप ने एक नया कार्यकारी आदेश जारी किया है, जिसके तहत विदेशी दवाओं पर 100% तक आयात शुल्क लगाने का प्रावधान है। इस आदेश का उद्देश्य अमेरिकी कंपनियों को प्रोत्साहित करना और विदेशी दवाओं पर निर्भरता को कम करना है। हालांकि, इस फैसले की आलोचना भी हो रही है, जिसमें दवाओं की कीमतों में वृद्धि और निवेश पर प्रभाव की आशंका जताई गई है। जानें इस आदेश के पीछे की वजहें और इसके संभावित प्रभाव।
 

डोनाल्ड ट्रंप का कार्यकारी आदेश

वॉशिंगटन: पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में एक नया कार्यकारी आदेश जारी किया है, जिसमें विदेशी दवाओं पर अधिकतम 100% तक आयात शुल्क लगाने का प्रावधान है।


इस आदेश के अनुसार, वे दवाएं जिनके लिए अमेरिकी कंपनियों के साथ कोई विशेष मूल्य समझौता नहीं किया गया है या जिनका उत्पादन अमेरिका में नहीं हो रहा है, उन पर उच्च टैरिफ लगाया जा सकता है। वहीं, जो कंपनियां अमेरिका में उत्पादन इकाइयां स्थापित कर रही हैं और मूल्य समझौते कर चुकी हैं, उन्हें टैरिफ से छूट दी जाएगी।


जिन कंपनियों ने अमेरिका में उत्पादन शुरू किया है लेकिन मूल्य समझौता नहीं किया है, उन पर 20% टैरिफ लगाया जाएगा, जो अगले चार वर्षों में बढ़कर 100% तक पहुंच सकता है। प्रशासन ने कंपनियों को बातचीत के लिए 120 से 180 दिनों का समय दिया है।


ट्रंप ने इस कदम को राष्ट्रीय सुरक्षा से संबंधित बताते हुए कहा कि विदेशी दवाओं और उनके कच्चे माल पर निर्भरता कम करना आवश्यक है।


हालांकि, इस फैसले की आलोचना भी हो रही है। PhRMA के सीईओ स्टीफन जे उब्ल ने चेतावनी दी है कि इससे दवाओं की कीमतों में वृद्धि हो सकती है और निवेश प्रभावित हो सकता है। उनका कहना है कि अमेरिका में पहले से ही बायोफार्मास्युटिकल उत्पादन मजबूत है और अधिकांश दवाएं भरोसेमंद देशों से आयात की जाती हैं।


इसके साथ ही ट्रंप प्रशासन ने स्टील, एल्यूमिनियम और तांबे जैसे धातुओं के आयात पर टैरिफ नीति को भी सख्त किया है। अब इन धातुओं और उनसे बने उत्पादों पर 50% तक शुल्क लगाया जाएगा। जिन उत्पादों में धातु की मात्रा 15% से कम है, उन पर देश-विशेष टैरिफ लागू होंगे, जबकि अधिक धातु वाले उत्पादों पर 25% शुल्क लगाया जाएगा।


गौरतलब है कि अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने फरवरी में कुछ पुराने टैरिफ को रद्द कर दिया था। इसके बाद ट्रंप प्रशासन ने सेक्टर-विशेष और उत्पाद-विशेष टैरिफ के जरिए अपनी सख्त व्यापार नीति को जारी रखा है।


ट्रंप का कहना है कि इन कदमों से व्यापार घाटा कम होगा, घरेलू उत्पादन को बढ़ावा मिलेगा और अमेरिकी कंपनियों को मजबूती मिलेगी। हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि इसका असर वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला और उपभोक्ता कीमतों पर भी पड़ सकता है।