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डेट फंड में निवेश: जानें इसके फायदे और जोखिम

बैंक फिक्स्ड डिपॉजिट के कम रिटर्न के चलते निवेशक अब डेट फंड की ओर बढ़ रहे हैं। ये फंड 8% से 10% तक रिटर्न दिखाते हैं, लेकिन क्या ये सुरक्षित हैं? जानें डेट फंड कैसे काम करते हैं, उनके फायदे और जोखिम, और निवेश से पहले किन बातों का ध्यान रखना चाहिए।
 

बैंक FD की तुलना में डेट फंड का बढ़ता आकर्षण

हाल के समय में, बैंक फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) पर मिलने वाले कम रिटर्न के कारण कई निवेशक डेट फंड की ओर आकर्षित हो रहे हैं। कुछ डेट फंड 8% से 10% तक रिटर्न प्रदान करते हैं, जिससे लोग इन्हें सुरक्षित और अधिक लाभकारी विकल्प मानते हैं। डेट फंड एक प्रकार का म्यूचुअल फंड है, जिसमें निवेशकों का पैसा शेयर बाजार में नहीं, बल्कि कंपनियों और सरकारी बॉंड में लगाया जाता है।


डेट फंड का कार्यप्रणाली

सरल शब्दों में, फंड हाउस बड़ी कंपनियों या सरकार को उधार देता है और इसके बदले में ब्याज प्राप्त करता है। यह ब्याज निवेशकों को रिटर्न के रूप में मिलता है। हालांकि, सभी कंपनियां सुरक्षित नहीं होतीं; कुछ मजबूत होती हैं और कम ब्याज पर उधार लेती हैं, जबकि अन्य कमजोर आर्थिक स्थिति में होती हैं और अधिक ब्याज का वादा करती हैं।


उच्च रिटर्न का जोखिम

कुछ डेट फंड अन्य फंड की तुलना में अधिक रिटर्न प्रदान करते हैं, लेकिन इसके पीछे अधिक जोखिम भी होता है। यदि कोई कंपनी समय पर पैसा वापस नहीं कर पाती या उसकी स्थिति खराब हो जाती है, तो फंड को नुकसान हो सकता है, जिसका सीधा असर निवेशकों पर पड़ता है। भारत में पिछले कुछ वर्षों में कई ऐसे मामले सामने आए हैं, जैसे फ्रैंकलिन टेम्पलटन और IL&FS, जिन्होंने दिखाया है कि डेट फंड पूरी तरह से सुरक्षित नहीं होते।


डेट फंड कैसे काम करते हैं?

डेट फंड सरकारी और कॉरपोरेट बॉंड तथा अन्य फिक्स्ड इनकम योजनाओं में निवेश करते हैं। इन बॉंड पर कंपनियां और सरकार निश्चित ब्याज देती हैं, जिससे फंड की कमाई होती है। यदि फंड सुरक्षित सरकारी बॉंड में निवेश करता है, तो जोखिम कम होता है, लेकिन कमजोर कंपनियों में निवेश करने पर अधिक खतरा हो सकता है।


निवेशकों को पहले भी नुकसान

2020 में, फ्रैंकलिन टेम्पलटन ने अपने 6 डेट फंड बंद कर दिए थे, जिसमें लगभग 26,000 करोड़ रुपये निवेशकों के फंसे थे। कंपनी ने कहा कि बाजार में नकदी की कमी आ गई थी। इसी तरह, IL&FS और DHFL के मामलों ने भी कई डेट फंड को प्रभावित किया।


ब्याज दरों में वृद्धि का प्रभाव

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) समय-समय पर रेपो रेट निर्धारित करता है। जब RBI महंगाई को नियंत्रित करने के लिए रेपो रेट बढ़ाता है, तो बाजार में लोन और ब्याज महंगे हो जाते हैं। इससे पुराने बॉंड की मांग कम हो जाती है और उनकी कीमत गिरने लगती है, जिससे डेट फंड की वैल्यू भी प्रभावित हो सकती है।


निवेश से पहले ध्यान देने योग्य बातें

डेट फंड पूरी तरह से सुरक्षित नहीं होते। उच्च रिटर्न के साथ उच्च जोखिम भी जुड़ा होता है। इसलिए, किसी भी डेट फंड में निवेश करने से पहले यह समझना आवश्यक है कि फंड का पैसा कहां लगाया जा रहा है, कंपनी की स्थिति क्या है, और संभावित नुकसान कितना हो सकता है।