डेटा सेंटर को रणनीतिक बुनियादी ढांचे के रूप में मान्यता देने की नीति आयोग की सिफारिश
नीति आयोग की नई रिपोर्ट
नीति आयोग ने हाल ही में एक रिपोर्ट जारी की है जिसमें कहा गया है कि डेटा सेंटर को केवल निवेश परियोजनाओं के रूप में नहीं, बल्कि एक महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे के रूप में देखा जाना चाहिए। इस रिपोर्ट का शीर्षक है ‘सतत विकास की योजना बनाने में राज्यों की मदद के लिए डेटा सेंटर मूल्यांकन रूपरेखा’। आयोग का मानना है कि केंद्र सरकार द्वारा निर्धारित मानकों और मार्गदर्शिकाओं से सभी राज्यों में डेटा केंद्रों के विकास को प्रोत्साहन मिलेगा।
रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया है कि डेटा सेंटर के विकास को बढ़ावा देने के लिए स्थानीय प्रणालियों की सुरक्षा, जनहित में लाभ सुनिश्चित करने और परियोजना के जीवनचक्र के दौरान जवाबदेही बनाए रखने के लिए व्यावहारिक दिशा-निर्देशों की आवश्यकता है।
डेटा सेंटर की स्थापना के लिए आवश्यकताएँ
इस रिपोर्ट में डेटा सेंटर स्थापित करने के लिए आवश्यक तैयारियों में कमी की पहचान करने, जिम्मेदार इकाई और कार्य की समयसीमा निर्धारित करने पर जोर दिया गया है। नीति आयोग के सीईओ अनुराग जैन ने कहा कि यह अच्छी बात है कि सभी राज्य डेटा सेंटर को आकर्षित करने के लिए नीतियाँ बना रहे हैं। उन्होंने बताया कि नौ या दस राज्यों ने इस दिशा में प्रारंभिक रुचि दिखाई है।
भारत उन देशों में शामिल है जो सतत विकास की दिशा में कदम बढ़ा रहे हैं। डेटा सेंटर का बढ़ता क्षेत्र न केवल निवेश को आकर्षित करता है, बल्कि यह देश की तेजी से विकसित होती कृत्रिम मेधा (एआई) अर्थव्यवस्था को भी मजबूत करता है।
आवश्यक संसाधनों का आकलन
हालांकि, डेटा केंद्र परियोजनाओं के लिए बड़ी मात्रा में बिजली, पानी, भूमि और अन्य बुनियादी ढांचे की आवश्यकता होती है। राज्यों को प्रस्तावित निवेश से मिलने वाले आर्थिक लाभ के साथ इन आवश्यकताओं का सही आकलन करने के लिए एक व्यवस्थित दृष्टिकोण अपनाने की आवश्यकता है।