डोनाल्ड ट्रंप के डीजल एक्सपोर्ट बैन से ऊर्जा संकट में फंसे सहयोगी देश
ट्रंप का बयान और ऊर्जा बाजार में हलचल
डोनाल्ड ट्रंप के एक बयान ने वैश्विक ऊर्जा बाजार में हलचल मचा दी है। अमेरिका ने घोषणा की है कि वह अपने डीजल निर्यात पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने जा रहा है। यह कदम 1970 के बाद से सबसे कठोर माना जा रहा है। इसका सीधा प्रभाव यह है कि अमेरिका के करीबी सहयोगी जैसे यूरोपीय संघ, ऑस्ट्रेलिया और मेक्सिको अब एक गंभीर ऊर्जा संकट का सामना कर सकते हैं, जो उनकी अर्थव्यवस्था को प्रभावित कर सकता है। लेकिन इस स्थिति का एक दिलचस्प मोड़ यह है कि जिन देशों ने भारत को रूसी तेल पर ज्ञान दिया था, वे अब भारत से ऊर्जा की मांग कर रहे हैं। इस प्रकार, वैश्विक ऊर्जा बाजार में समीकरण बदल गए हैं, और भारत अब एक प्रमुख ऊर्जा आपूर्तिकर्ता बन गया है।
ट्रंप के कदम का कारण
22 सितंबर को यूएन जनरल असेंबली में ट्रंप ने स्पष्ट किया कि अमेरिका अपने नागरिकों के लिए डीजल का उत्पादन बढ़ाना चाहता है, इसलिए निर्यात रोकना आवश्यक है। उनके साथ मौजूद अधिकारियों ने भी इस प्रतिबंध को लागू करने की प्रक्रिया पर तेजी से काम करने की बात कही।
अमेरिका में बढ़ती कीमतें
अमेरिका में ईंधन की कीमतें रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई हैं। कैलिफोर्निया में डीजल की कीमत $0.89 प्रति गैलन और राष्ट्रीय औसत $6.5 प्रति गैलन से अधिक हो गई है।
घरेलू राजनीति और चुनाव
ट्रंप के समर्थक क्षेत्रों में डीजल निर्यात पर रोक लगाने से स्थानीय स्तर पर डीजल की आपूर्ति बढ़ेगी और कीमतें अस्थायी रूप से कम हो सकती हैं।
संभावित संकट
अमेरिका वर्तमान में प्रतिदिन लगभग 1.6 मिलियन बैरल डीजल का निर्यात करता है। यदि यह बड़ा आपूर्तिकर्ता अचानक बाजार से बाहर हो जाता है, तो यूरोप को गंभीर संकट का सामना करना पड़ सकता है। यूरोप की ऊर्जा आपूर्ति अमेरिका के गल्फ कोस्ट पर निर्भर है, और हाल ही में डीजल की मांग में कमी आई है।
ऑस्ट्रेलिया और मेक्सिको की स्थिति
ऑस्ट्रेलिया के पास सीमित रिफाइनिंग क्षमता है और उनका अधिकांश डीजल समुद्र के रास्ते आता है। वहीं, मेक्सिको के कृषि क्षेत्र में 60% से अधिक ऊर्जा अमेरिकी डीजल पाइपलाइन से आती है। यदि अमेरिका डीजल निर्यात रोकता है, तो इन देशों की कृषि गतिविधियां प्रभावित हो सकती हैं।
भारत की भूमिका
भारत दुनिया का चौथा सबसे बड़ा रिफाइनर है, जिसकी रिफाइनिंग क्षमता 5.6 मिलियन बैरल प्रतिदिन है। भारत वैश्विक बाजार में अपने रिफाइनिंग का 20% हिस्सा निर्यात करता है। यूरोप में डीजल की आपूर्ति का एक बड़ा हिस्सा भारत से आता है, जिससे भारत अब वैश्विक ऊर्जा संकट में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।