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ताइवान ने शेयर बाजार में भारत को पीछे छोड़ा: जानें इसके पीछे के कारण

ताइवान ने शेयर बाजार की वैल्यू में भारत को पीछे छोड़ दिया है, जिससे वह दुनिया का पांचवां सबसे बड़ा शेयर बाजार बन गया है। इस लेख में हम जानेंगे कि कैसे ताइवान की छोटी जनसंख्या और मजबूत सेमीकंडक्टर उद्योग ने इसे इस मुकाम तक पहुँचाया। इसके विपरीत, भारतीय बाजार कई चुनौतियों का सामना कर रहा है, जैसे कि ऊर्जा की बढ़ती कीमतें और विदेशी निवेशकों की बिकवाली। जानें इस बदलाव के पीछे के कारण और ताइवान की सफलता का रहस्य।
 

ताइवान का शेयर बाजार भारत से आगे


ताइवान ने अब शेयर बाजार की कुल वैल्यू के मामले में भारत को पीछे छोड़ दिया है, भले ही यह देश आकार और जनसंख्या में भारत से काफी छोटा है। ताइवान का शेयर बाजार का कुल मार्केट कैप लगभग 4.95 ट्रिलियन डॉलर तक पहुँच गया है, जबकि भारत का मार्केट कैप लगभग 4.92 ट्रिलियन डॉलर है। इस उपलब्धि के साथ, ताइवान अब दुनिया का पांचवां सबसे बड़ा शेयर बाजार बन गया है, जबकि भारत छठे स्थान पर आ गया है।


आर्थिक विशेषज्ञों की राय

यह परिवर्तन कई आर्थिक विशेषज्ञों के लिए चौंकाने वाला है, क्योंकि भारत की अर्थव्यवस्था बहुत बड़ी है और यहाँ की जनसंख्या 140 करोड़ से अधिक है। इसके विपरीत, ताइवान की जनसंख्या केवल 2.3 करोड़ के आसपास है, जो दिल्ली की जनसंख्या से भी कम है। इसके बावजूद, वैश्विक निवेशक इस समय ताइवान के शेयर बाजार में अधिक रुचि दिखा रहे हैं।


ताइवान की सफलता का रहस्य

ताइवान की इस तेज़ प्रगति का मुख्य कारण आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और सेमीकंडक्टर उद्योग की मजबूत वृद्धि है। ताइवान में 'ताइवान सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग कंपनी' जैसी दुनिया की सबसे बड़ी चिप निर्माता कंपनी मौजूद है, जो एआई तकनीक और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों में उपयोग होने वाली उन्नत चिप्स बनाने में अग्रणी है।


दुनिया भर में आए एआई बूम का सबसे बड़ा लाभ टीएसएमसी को मिला है, जिसके ग्राहकों में एनवीडिया, एप्पल, क्वालकॉम और एएमडी जैसी प्रमुख टेक कंपनियाँ शामिल हैं। एआई चिप्स की बढ़ती मांग के कारण इस वर्ष टीएसएमसी के शेयरों में जबरदस्त वृद्धि हुई है। यह कंपनी ताइवान के शेयर बाजार के इंडेक्स का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, जो देश की मार्केट ग्रोथ में इसकी भूमिका को दर्शाता है।


इसके साथ ही, वैश्विक निवेशक सेमीकंडक्टर और एआई क्षेत्र में भारी निवेश कर रहे हैं। ताइवान और दक्षिण कोरिया जैसे देशों को इस प्रवृत्ति का भरपूर लाभ मिल रहा है, क्योंकि उनके पास पहले से ही मजबूत तकनीकी और चिप निर्माण का ढांचा है।


भारतीय बाजार की चुनौतियाँ

वहीं, भारतीय बाजार इस समय कई चुनौतियों का सामना कर रहा है। ऊर्जा की बढ़ती कीमतें, कंपनियों के मुनाफे में कमी, विदेशी निवेशकों द्वारा बिकवाली और देश में किसी बड़ी एआई या सेमीकंडक्टर कंपनी का अभाव बाजार के माहौल को प्रभावित कर रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि भारत के पास वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धा करने वाली एआई हार्डवेयर या चिप कंपनियाँ नहीं हैं, जो बड़े अंतरराष्ट्रीय निवेश को आकर्षित कर सकें। इसके अलावा, भारतीय रुपये की लगातार कमजोरी ने भी विदेशी निवेशकों की चिंताओं को बढ़ा दिया है, जिससे वे भारतीय बाजार से पैसे निकालकर ताइवान जैसी तकनीकी-संचालित अर्थव्यवस्थाओं में निवेश कर रहे हैं।