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थोक मुद्रास्फीति में कमी, जुलाई में 9.78 प्रतिशत पर पहुंची

जुलाई में थोक मुद्रास्फीति में गिरावट आई है, जो 9.78 प्रतिशत पर पहुंच गई है। ईंधन और खाद्य वस्तुओं की कीमतों में कमी के चलते यह आंकड़ा घटा है। हालांकि, खाद्य वस्तुओं की मुद्रास्फीति भी 5.44 प्रतिशत पर आ गई है। भारतीय रिजर्व बैंक ने मौद्रिक नीति को स्थिर रखा है, जबकि खाद्य कीमतों में वृद्धि के कारण खुदरा मुद्रास्फीति में भी बढ़ोतरी हुई है। जानें इस स्थिति के पीछे के कारण और इसके संभावित प्रभाव।
 

थोक मुद्रास्फीति में गिरावट

जुलाई में थोक मुद्रास्फीति 9.78 प्रतिशत पर आ गई, जो जून में 9.87 प्रतिशत थी। ईंधन, बिजली और खाद्य वस्तुओं की कीमतों में कमी के चलते यह गिरावट आई है। यह पहली बार है जब नए आधार वर्ष 2022-23 के तहत थोक मूल्य सूचकांक (डब्ल्यूपीआई) के आंकड़ों में मासिक आधार पर गिरावट देखी गई है। पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष और होर्मुज जलडमरूमध्य में अवरोध के कारण वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल और उर्वरक की कीमतों में वृद्धि हुई है, जिसका प्रभाव खाद्य वस्तुओं की कीमतों पर भी पड़ा है।


भारत का कच्चे तेल का आयात

भारत अपने अधिकांश कच्चे तेल का आयात इसी मार्ग से करता है। चालू वित्त वर्ष 2026-27 की शुरुआत से थोक महंगाई में लगातार वृद्धि देखी गई है। वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय ने शुक्रवार को डब्ल्यूपीआई के आंकड़े जारी करते हुए बताया कि जुलाई 2026 में खनिज तेल, खाद्य वस्तुएं, बुनियादी धातुओं का उत्पादन, गैर-खाद्य वस्तुएं, खाद्य उत्पादों का निर्माण और रसायनों का उत्पादन थोक मुद्रास्फीति के प्रमुख कारण रहे। जुलाई में ईंधन और बिजली क्षेत्र में थोक मुद्रास्फीति घटकर 20.05 प्रतिशत हो गई, जो जून में 27.41 प्रतिशत थी।


खाद्य वस्तुओं की मुद्रास्फीति

खाद्य वस्तुओं की मुद्रास्फीति जुलाई में 5.44 प्रतिशत रही, जबकि जून में यह 5.49 प्रतिशत थी। वहीं, विनिर्मित उत्पादों की मुद्रास्फीति जुलाई में बढ़कर 8.29 प्रतिशत हो गई, जो जून में 7.48 प्रतिशत थी। हाल ही में जारी आंकड़ों के अनुसार, खाद्य कीमतों में वृद्धि के चलते भारत की खुदरा मुद्रास्फीति जुलाई में 4.45 प्रतिशत तक पहुंच गई, जो जून में 4.38 प्रतिशत थी।


आरबीआई की मौद्रिक नीति

भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) की मौद्रिक नीति समिति ने इस महीने की शुरुआत में नीतिगत दरों को 5.25 प्रतिशत पर बनाए रखा था। समिति ने अल नीनो की स्थिति के कारण दक्षिण-पश्चिम मानसून के कमजोर और असमान रहने का हवाला देते हुए वित्त वर्ष 2026-27 के लिए खुदरा मुद्रास्फीति का अनुमान 5 प्रतिशत रखा है।