दिल्ली में त्योहारों के मौसम में रैली का असर: बाजारों में गिरावट
त्योहारों के मौसम में बाजारों की रौनक गायब
राजधानी दिल्ली में त्योहारों के समय बाजारों में जो भीड़ और रौनक की उम्मीद थी, वह रविवार को कई प्रमुख व्यापारिक क्षेत्रों में नहीं दिखी। रामलीला मैदान में विपक्षी दलों के बड़े राजनीतिक कार्यक्रम के कारण कनॉट प्लेस और उसके आस-पास के बाजारों में सामान्य गतिविधियों में बाधा आई। पालिका बाजार, जनपथ, सुपर बाजार और चावड़ी बाजार जैसे स्थानों पर दीपावली की खरीदारी पर नकारात्मक प्रभाव पड़ा। व्यापारिक संगठन चैंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री (CTI) ने बताया कि इस आयोजन के चलते रामलीला मैदान के आसपास के लगभग 20 बाजारों में लगभग 11 हजार करोड़ रुपये की बिक्री प्रभावित हुई। हालांकि, यह आंकड़ा व्यापारियों द्वारा प्रस्तुत अनुमान है।कनॉट प्लेस पर रैली का विशेष प्रभाव
कनॉट प्लेस और उसके आसपास के व्यापारिक प्रतिष्ठानों को रैली स्थल के निकटता के कारण विशेष कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। रविवार को नेताओं की आवाजाही के कारण आउटर सर्कल से मिंटो ब्रिज की दिशा में भी स्थिति प्रभावित रही। व्यापारियों के अनुसार, ग्राहकों में सुरक्षा और रास्तों को लेकर चिंता बनी रही, जिसके चलते कई दुकानों ने दिन के अधिकांश समय तक शटर नहीं खोले।
बीस बाजारों में बिक्री में कमी का दावा
CTI के अनुसार, रामलीला मैदान के आसपास के लगभग 20 व्यापारिक क्षेत्रों में बिक्री को गंभीर झटका लगा। संगठन के अध्यक्ष बृजेश गोयल ने कहा कि कई बाजारों में केवल एक दुकान ही खुल सकी। दिल्ली के बाहर से आने वाले छोटे दुकानदारों और खुदरा व्यापारियों ने भी राजधानी में आने से परहेज किया।
राजनीतिक नेताओं से रैली टालने की अपील
व्यापारिक संगठनों ने दीपावली की खरीदारी को ध्यान में रखते हुए राजनीतिक दलों के नेताओं से रैली की तारीख को आगे बढ़ाने का अनुरोध किया था। व्यापारियों ने राहुल गांधी, मल्लिकार्जुन खरगे, अखिलेश यादव और ममता बनर्जी को पत्र भेजकर त्योहार के बाद कार्यक्रम आयोजित करने की मांग की थी।
राजनीतिक आरोपों के बीच व्यापारिक नुकसान पर चर्चा
कनॉट प्लेस की दुकानों के बंद रहने को लेकर राजनीतिक बयानबाजी भी हुई। कांग्रेस ने सोशल मीडिया पर आरोप लगाया कि भाजपा ने दुकानों को बंद करवाया। दूसरी ओर, व्यापारिक संगठनों ने रैली और उससे उत्पन्न आशंकाओं को व्यापार पर प्रभाव डालने का कारण बताया।