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दिल्ली में दिवाली खरीदारी पर कांग्रेस रैली का असर: व्यापारियों की चिंता

दिल्ली में दिवाली के समय कांग्रेस की प्रस्तावित रैली से व्यापारियों में चिंता बढ़ गई है। चैंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री (CTI) ने रैली को दिवाली के बाद आयोजित करने की अपील की है, क्योंकि इससे ट्रैफिक व्यवस्था प्रभावित हो सकती है और व्यापार को 10,000 करोड़ रुपये तक का नुकसान हो सकता है। CTI ने 21 प्रमुख बाजारों को संभावित रूप से प्रभावित क्षेत्रों में शामिल किया है। व्यापारियों का कहना है कि रैली के कारण ग्राहकों की आवाजाही बाधित हो सकती है। जानें इस मुद्दे पर और क्या कहा गया है।
 

राजनीतिक रैली का व्यापार पर प्रभाव


नई दिल्ली: दिल्ली में दिवाली के समय होने वाली खरीदारी पर कांग्रेस की प्रस्तावित रैली का नकारात्मक प्रभाव पड़ने की आशंका जताई जा रही है। चैंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री (CTI) ने कांग्रेस से अनुरोध किया है कि 1 नवंबर को रामलीला मैदान में होने वाली रैली को दिवाली के बाद आयोजित किया जाए। व्यापारियों का कहना है कि यदि रैली के कारण ट्रैफिक व्यवस्था बाधित होती है, तो दिल्ली के व्यापार को 10,000 करोड़ रुपये तक का नुकसान हो सकता है। CTI के चेयरमैन बृजेश गोयल ने राहुल गांधी को पत्र लिखकर रैली की तारीख को आगे बढ़ाने की मांग की है, और पत्र की एक प्रति कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे को भी भेजी गई है।


रैली में भीड़ और ट्रैफिक की चिंता

CTI के अनुसार, कांग्रेस नेताओं ने रैली में लगभग 10 लाख लोगों के शामिल होने की संभावना जताई है। इस अनुमान के आधार पर, संगठन का कहना है कि दिल्ली में 15,000 से 20,000 वाहन आ सकते हैं, जिनमें 10,000 से 12,000 बड़ी बसें और 5,000 से 7,000 छोटी गाड़ियां शामिल हैं। संगठन ने यह भी सवाल उठाया है कि इतनी बड़ी संख्या में वाहनों के लिए पार्किंग की व्यवस्था कैसे होगी, क्योंकि रामलीला मैदान के आसपास अधिकृत पार्किंग में 200 गाड़ियों की भी जगह नहीं है। CTI को डर है कि इससे 10 किलोमीटर के दायरे में जाम लग सकता है। हालांकि, यह संख्या संगठन के अनुमान पर आधारित है।


प्रभावित बाजारों की सूची

दिल्ली के 21 प्रमुख बाजारों पर पड़ सकता है असर


CTI ने चांदनी चौक, सदर बाजार, खारी बावली, भागीरथ पैलेस, चावड़ी बाजार, कश्मीरी गेट, करोल बाग, दरियागंज, पहाड़गंज, जामा मस्जिद और गफ्फार मार्केट समेत 21 बाजारों को संभावित रूप से प्रभावित क्षेत्रों में शामिल किया है। इन बाजारों में मसाले, सूखे मेवे, इलेक्ट्रॉनिक्स, ज्वेलरी, किताबें, हार्डवेयर और ऑटो पार्ट्स का बड़ा कारोबार होता है। व्यापारियों का कहना है कि पुरानी दिल्ली की संकरी गलियों में वाहनों की आवाजाही बाधित होने से सामान की डिलीवरी भी रुक सकती है।


दिवाली के बाद रैली कराने का सुझाव

दिवाली के बाद रैली कराने का सुझाव


CTI ने कांग्रेस से अनुरोध किया है कि रैली को 10 नवंबर के बाद आयोजित किया जाए। संगठन का कहना है कि दिवाली के आसपास कपड़े, गहने, इलेक्ट्रॉनिक्स और घरेलू सामान की खरीदारी बढ़ जाती है, इसलिए इस समय बाजारों तक पहुंच बाधित होने से कारोबार को नुकसान हो सकता है। यदि तारीख बदलना संभव न हो, तो संगठन ने रैली को बुराड़ी ग्राउंड या जवाहरलाल नेहरू स्टेडियम जैसे बड़े स्थान पर आयोजित करने का सुझाव दिया है। CTI का कहना है कि इससे रामलीला मैदान के आसपास के व्यस्त बाजारों पर दबाव कम किया जा सकता है। वास्तविक नुकसान कितना होगा, यह रैली में आने वाली भीड़ और लागू यातायात प्रतिबंधों पर निर्भर करेगा।