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दिल्ली सरकार की बिजली सब्सिडी योजना में खामियां उजागर: कैग रिपोर्ट

दिल्ली सरकार की बिजली सब्सिडी योजना में कई खामियां उजागर हुई हैं, जिनमें उच्च खपत करने वालों को अधिक लाभ मिलने की बात सामने आई है। कैग की रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि कई उपभोक्ताओं ने शून्य खपत के बावजूद सब्सिडी का लाभ लिया। इसके अलावा, रिपोर्ट में पारदर्शिता बढ़ाने और उपभोक्ता डेटा की नियमित जांच की सिफारिश की गई है। जानें पूरी रिपोर्ट में और क्या कहा गया है।
 

कैग की रिपोर्ट में बिजली सब्सिडी योजना की खामियां

नयी दिल्ली, सात अगस्त: नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) ने 2019-20 से 2022-23 के बीच दिल्ली सरकार की बिजली सब्सिडी योजना में कई महत्वपूर्ण खामियों का खुलासा किया है। रिपोर्ट के अनुसार, बिना बिजली खपत वाले कनेक्शनों को भी 42.26 करोड़ रुपये की सब्सिडी दी गई। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने शुक्रवार को विधानसभा में इस रिपोर्ट को पेश किया।


कैग की रिपोर्ट में बताया गया है कि कम बिजली खपत करने वाले उपभोक्ताओं को अपेक्षाकृत कम सब्सिडी मिली, जबकि अधिक खपत करने वालों को अधिक लाभ मिला। शून्य से 200 यूनिट तक खपत करने वाले 30 लाख से अधिक उपभोक्ताओं को औसतन 6,000 रुपये सालाना सब्सिडी प्राप्त हुई, जबकि 201-400 यूनिट खपत करने वाले 16.6 लाख उपभोक्ताओं को 10,000 रुपये से अधिक, यानी लगभग 70 प्रतिशत ज्यादा सब्सिडी दी गई।


इसके अतिरिक्त, रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया है कि कई उपभोक्ताओं ने लगातार कई बिलिंग चक्रों में शून्य खपत के बावजूद सब्सिडी का लाभ उठाया। दिल्ली सरकार ने अगस्त 2019 में इस योजना की शुरुआत की थी, जिसमें 200 यूनिट तक बिजली मुफ्त और 201-400 यूनिट पर 50 प्रतिशत सब्सिडी (अधिकतम 800 रुपये) दी जाती है। सब्सिडी का खर्च 2019-20 में 2,405.59 करोड़ रुपये से बढ़कर 2022-23 में 3,161 करोड़ रुपये हो गया।


कैग ने अपनी रिपोर्ट में पारदर्शिता बढ़ाने और उपभोक्ता डेटा की नियमित जांच की सिफारिश की है, ताकि सब्सिडी का लाभ सही लोगों तक पहुंचे और दुरुपयोग को रोका जा सके। इसके अलावा, कैग ने दिल्ली राज्य औद्योगिक एवं अवसंरचना विकास निगम (डीएसआईआईडीसी) की बापरोला में मौजूद 81.42 एकड़ जमीन के 17 वर्षों तक उपयोग न होने पर भी सवाल उठाए हैं। रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2006 में जेम्स एंड ज्वेलरी पार्क के लिए ली गई जमीन पर बार-बार योजना में बदलाव के कारण 29.45 करोड़ रुपये का खर्च बेकार गया।