दिवाली से पहले मोदी सरकार का बड़ा फैसला: पेट्रोल पर टैक्स शून्य, डीजल पर बढ़ा बोझ
पेट्रोलियम उत्पादों के निर्यात पर नया निर्णय
नई दिल्ली: मोदी सरकार ने दिवाली के अवसर पर पेट्रोलियम उत्पादों के निर्यात से संबंधित एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। वित्त मंत्रालय ने 31 अक्टूबर को जारी एक अधिसूचना में पेट्रोल पर लगने वाली एक्सपोर्ट ड्यूटी को समाप्त कर दिया है, जबकि डीजल और एटीएफ (एविएशन टर्बाइन फ्यूल) पर विंडफॉल टैक्स में वृद्धि की गई है। ये नए दरें 31 अक्टूबर से प्रभावी हो गई हैं और अगले 15 दिनों तक लागू रहेंगी।
सरकार ने बताया कि यह निर्णय वैश्विक ऊर्जा बाजार में हो रहे उतार-चढ़ाव और पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव को ध्यान में रखते हुए लिया गया है। सरकार हर 15 दिन में इन टैक्स की समीक्षा करती है ताकि अंतरराष्ट्रीय कीमतों और घरेलू आपूर्ति के बीच संतुलन बना रहे।
पेट्रोल पर राहत, डीजल पर बढ़ा टैक्स
अधिसूचना के अनुसार, पहले पेट्रोल के निर्यात पर 2.50 रुपये प्रति लीटर की स्पेशल एडिशनल एक्साइज ड्यूटी (SAED) लगती थी, जिसे अब शून्य कर दिया गया है। इसका अर्थ है कि रिफाइनरी कंपनियों को अब पेट्रोल का निर्यात करने पर कोई अतिरिक्त टैक्स नहीं देना होगा।
वहीं, एटीएफ पर SAED को 10.50 रुपये प्रति लीटर से बढ़ाकर 11 रुपये प्रति लीटर कर दिया गया है। डीजल पर सबसे बड़ा इजाफा किया गया है, जहां SAED और रोड इंफ्रास्ट्रक्चर सेस को मिलाकर कुल टैक्स 8.50 रुपये से बढ़ाकर 11.50 रुपये प्रति लीटर कर दिया गया है, यानी 3 रुपये प्रति लीटर की सीधी बढ़ोतरी।
घरेलू बाजार पर कोई प्रभाव नहीं
वित्त मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि यह बदलाव केवल निर्यात पर लागू होगा। घरेलू बाजार में बिकने वाले पेट्रोल और डीजल पर ड्यूटी में कोई परिवर्तन नहीं किया गया है, इसलिए आम जनता पर इसका कोई प्रत्यक्ष प्रभाव नहीं पड़ेगा। वास्तव में, विंडफॉल टैक्स तब लगाया जाता है जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतें बढ़ने से तेल कंपनियों को विदेश में ईंधन बेचकर असाधारण लाभ होता है। सरकार इस अतिरिक्त लाभ का एक हिस्सा टैक्स के रूप में लेती है और कंपनियों को घरेलू बाजार में आपूर्ति बनाए रखने के लिए प्रोत्साहित करती है।
भारत ने पहली बार जुलाई 2022 में विंडफॉल टैक्स लागू किया था। इसे दिसंबर 2024 में हटा दिया गया था, लेकिन मार्च 2026 में कच्चे तेल की कीमतों में वृद्धि के बाद इसे फिर से लागू किया गया। तब से हर 15 दिन में इसकी समीक्षा की जा रही है।