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दिसंबर 2026 से महंगे हो सकते हैं होम और कार लोन: रिपोर्ट

भारतीय रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति में संभावित बदलावों के चलते दिसंबर 2026 से होम और कार लोन महंगे हो सकते हैं। बोफा सिक्योरिटीज की रिपोर्ट में घरेलू कारकों के प्रभाव और जीडीपी ग्रोथ के संकेतों पर चर्चा की गई है। रिपोर्ट के अनुसार, यदि मानसून कमजोर रहता है, तो खाद्य महंगाई में वृद्धि हो सकती है। इसके अलावा, नॉन-बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनियों को लाभ मिलने की उम्मीद है, लेकिन आम आदमी पर ब्याज दरों में वृद्धि का बोझ पड़ेगा।
 

महंगाई का खतरा बढ़ता हुआ

नई दिल्ली: भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने भले ही वर्तमान में रेपो रेट में कोई परिवर्तन नहीं किया है, लेकिन भविष्य में आम जनता को महंगाई का बड़ा झटका लग सकता है। ग्लोबल ब्रोकरेज फर्म बोफा सिक्योरिटीज की हालिया रिपोर्ट के अनुसार, दिसंबर 2026 से आरबीआई ब्याज दरों में 50 बेसिस प्वाइंट (0.50%) तक की वृद्धि कर सकता है। यदि ऐसा होता है, तो बैंकों से ऋण लेना महंगा हो जाएगा, जिसका सीधा असर आपकी ईएमआई पर पड़ेगा।


घरेलू कारक महंगाई को बढ़ाएंगे

रिपोर्ट में बताया गया है कि अब अर्थव्यवस्था के लिए सबसे बड़ा खतरा वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव नहीं, बल्कि घरेलू कारक जैसे मौसम और मानसून बन गए हैं। आरबीआई की मौद्रिक नीति में इन घरेलू कारकों की महत्वपूर्ण भूमिका होगी। यदि मानसून सामान्य से कमजोर रहता है और अल नीनो का प्रभाव बढ़ता है, तो वित्त वर्ष की दूसरी छमाही में खाद्य महंगाई में तेजी आ सकती है। इसका प्रभाव ग्रामीण और शहरी दोनों अर्थव्यवस्थाओं पर पड़ेगा।


जीडीपी ग्रोथ और राहत के संकेत

बोफा सिक्योरिटीज ने भारत की वित्त वर्ष 2026-27 की जीडीपी विकास दर का अनुमान 6.5% से बढ़ाकर 6.9% कर दिया है। देश में बढ़ती खपत और निवेश से आर्थिक विकास को मजबूती मिलने की उम्मीद है। उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) आधारित महंगाई का अनुमान 4.8% रखा गया है। राहत की बात यह है कि देश में खाद्यान्न का पर्याप्त भंडार और वैश्विक स्तर पर कमोडिटी व कच्चे तेल की कम कीमतें महंगाई के दबाव को कम कर सकती हैं। FY27 में चालू खाता घाटा जीडीपी के 1.2% और राजकोषीय घाटा 4.5% तक सीमित रहने का अनुमान है।


एनबीएफसी को लाभ, लेकिन आम आदमी पर बोझ

इस मजबूत आर्थिक माहौल से नॉन-बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनियों (NBFCs) को लाभ होने की संभावना है। रिटेल लोन, वाहन ऋण और एमएसएमई लोन की मांग में वृद्धि हो सकती है। हालांकि, रिपोर्ट में यह भी स्पष्ट किया गया है कि साल के अंत में आरबीआई द्वारा ब्याज दरें बढ़ाने से बैंकों और एनबीएफसी के लिए फंड जुटाने की लागत बढ़ जाएगी। इसका सीधा असर ग्राहकों पर पड़ेगा, जिससे भविष्य में होम लोन, कार लोन और व्यक्तिगत लोन की ब्याज दरें महंगी हो जाएंगी।