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दूरसंचार विभाग ने इंटरनेट निरपेक्षता नियमों की समीक्षा की मांग की

दूरसंचार विभाग ने ट्राई से इंटरनेट निरपेक्षता के नियमों की समीक्षा करने का अनुरोध किया है। यह कदम नई तकनीकों और 5जी के आगमन के मद्देनजर उठाया गया है। विभाग का मानना है कि नियमों में बदलाव से उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा होगी और सेवा की गुणवत्ता में सुधार होगा। जानें इस विषय पर और क्या कहा गया है।
 

दूरसंचार विभाग की नई पहल

नई दिल्ली, तीन अगस्त: दूरसंचार विभाग ने प्रौद्योगिकी और बाजार के बदलते परिदृश्य को ध्यान में रखते हुए ट्राई से इंटरनेट निरपेक्षता के मौजूदा नियमों की समीक्षा करने का अनुरोध किया है। सूत्रों के अनुसार, यह जानकारी सोमवार को सामने आई। इंटरनेट निरपेक्षता का अर्थ है कि सभी वेबसाइटों, ऐप्स और सेवाओं के साथ समान व्यवहार किया जाए।


इसका मतलब है कि दूरसंचार कंपनियां किसी सामग्री को जानबूझकर तेज या धीमा नहीं कर सकतीं, और न ही इसके लिए अतिरिक्त शुल्क ले सकती हैं। सूत्रों के मुताबिक, दूरसंचार विभाग ने ट्राई से कहा है कि नई प्रौद्योगिकियों और नेटवर्क के बदलते उपयोग को ध्यान में रखते हुए इन नियमों पर पुनर्विचार किया जाए। विशेष रूप से 5जी प्रौद्योगिकी के आगमन से नेटवर्क को विभिन्न हिस्सों में विभाजित करके उपयोग करने की क्षमता में वृद्धि हुई है।


सूत्रों ने बताया कि दूरसंचार विभाग ने कहा है कि 2017 में ट्राई की सिफारिशों को लाइसेंस शर्तों में शामिल करने के बाद से इस क्षेत्र में तकनीकी और बाजार स्तर पर महत्वपूर्ण परिवर्तन हुए हैं। ऐसे में यह आवश्यक है कि नियम उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा करें और सेवा की गुणवत्ता बनाए रखें, साथ ही नई तकनीक और नवाचार को भी प्रोत्साहित करें। आज का दूरसंचार क्षेत्र केवल कॉल तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह पूरी तरह डेटा पर आधारित हो चुका है।


4जी और 5जी सेवाओं के विस्तार, इंटरनेट के बढ़ते उपयोग और क्लाउड सेवाओं के कारण लोगों की आवश्यकताएं और अपेक्षाएं भी बदल गई हैं। हाल के दिनों में 5जी से जुड़ी कुछ प्रीमियम सेवाओं पर यह बहस तेज हो गई है कि क्या ये सेवाएं इंटरनेट निरपेक्षता के सिद्धांतों के अनुरूप हैं। सूत्रों के अनुसार, दूरसंचार विभाग का मानना है कि समय-समय पर समीक्षा से यह सुनिश्चित किया जा सकेगा कि भारत का नियामकीय ढांचा बदलती प्रौद्योगिकी के साथ तालमेल बनाए रख सके।