निर्मला सीतारमण ने ईमानदार करदाताओं के लिए प्रक्रिया को सरल बनाने पर जोर दिया
आयकर विभाग की नई प्राथमिकताएँ
केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने शुक्रवार को आयकर विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे ईमानदार करदाताओं के लिए प्रक्रियाओं को सरल बनाएं और जानबूझकर कर चोरी करने वालों के खिलाफ कठोर कदम उठाएं। उन्होंने उत्तरदायी कर प्रशासन के लिए पहचान, प्रतिक्रिया, निवारण, समीक्षा और सुधार पर जोर दिया। वित्त मंत्री ने 167वें आयकर दिवस के अवसर पर कहा कि विभाग की भूमिका अब केवल कर संग्रह तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें पारदर्शिता, दक्षता, व्यापार सुगमता और सेवा भावना भी शामिल है।
आयकर विभाग का विकास
सीतारमण ने कहा कि आयकर विभाग ने डेढ़ सदी में भारत के आर्थिक परिवर्तन के साथ खुद को विकसित किया है। उन्होंने बताया कि आयकर अधिनियम, 2025 के लागू होने से कानून को सरल बनाया गया है, जिससे अनिश्चितता कम हुई है और अनुपालन की लागत में कमी आई है। ई-फाइलिंग पोर्टल की क्षमता में वृद्धि के कारण इस बार आयकर रिटर्न दाखिल करने की प्रक्रिया और भी मजबूत हुई है।
रिटर्न दाखिल करने की प्रक्रिया
वर्तमान सत्र में 21 जुलाई तक 3.2 करोड़ से अधिक रिटर्न दाखिल किए जा चुके हैं, जिनमें से लगभग 94 प्रतिशत का सत्यापन और 60 प्रतिशत का निपटान किया गया है। इसके अलावा, 1.3 करोड़ से अधिक कर रिफंड दावे किए गए हैं, जिनमें 96 प्रतिशत को सत्यापित और 40 प्रतिशत को निपटाया गया है। सीतारमण ने कहा कि रिफंड प्रक्रिया में तेजी लाने से करदाताओं का विश्वास बढ़ता है और उनकी नकदी स्थिति मजबूत होती है।
ईमानदार करदाताओं के लिए दृष्टिकोण
उन्होंने कहा कि हमारा दृष्टिकोण ऐसा होना चाहिए कि ईमानदार करदाताओं को सुविधा मिले, वास्तविक त्रुटियों को सुधारने का अवसर दिया जाए और जानबूझकर कर चोरी करने वालों पर सख्त कार्रवाई की जाए। वित्त मंत्री ने आयकर अधिकारियों से कहा कि कर कानून द्वारा प्रदत्त अधिकारों का प्रयोग हमेशा विनम्रता से किया जाना चाहिए।
विवाद प्रबंधन और निपटान
सीतारमण ने कर विवादों को कम करने और कर निश्चितता बढ़ाने पर भी जोर दिया। राजस्व सचिव अरविंद श्रीवास्तव ने बताया कि वित्त वर्ष 2025-26 में 2.24 लाख अपीलों का निपटान किया गया, जो पिछले वर्ष की तुलना में 30 प्रतिशत अधिक है। उन्होंने कहा कि विभाग ने प्रक्रियागत नियमों को सरल बनाने और प्रौद्योगिकी के अधिक उपयोग के जरिए विवादों को कम करने के प्रयास किए हैं।
समस्याओं का समाधान
सीबीडीटी के चेयरमैन रवि अग्रवाल ने कहा कि शिकायतों के समाधान में सुधार हुआ है और समय में कमी आई है। पिछले वित्त वर्ष में विभाग ने 77,765 शिकायतों में से 72,933 का समाधान किया। इसके साथ ही, ई-निवारण के तहत 3,43,269 शिकायतों में से 95 प्रतिशत का निपटान किया गया है।