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निर्यातकों के लिए आरओडीटीईपी योजना का विस्तार: भारत की प्रतिस्पर्धा को मजबूती

निर्यात किए गए उत्पादों पर शुल्क और करों में छूट (आरओडीटीईपी) योजना का विस्तार 31 दिसंबर तक किया गया है, जो निर्यातकों के लिए महत्वपूर्ण है। यह कदम भारत की निर्यात प्रतिस्पर्धा को बनाए रखने में मदद करेगा। योजना की शुरुआत 2021 में हुई थी और इसके तहत निर्यातकों को विभिन्न करों की वापसी की जाती है। उद्योग मंडल सीआईआई ने इस योजना को 2026 तक जारी रखने की सिफारिश की है। जानें इस योजना के विस्तार से निर्यातकों को क्या लाभ होगा और भारत का निर्यात आंकड़ा क्या है।
 

आरओडीटीईपी योजना का महत्व

नई दिल्ली, 3 अक्टूबर: निर्यात किए गए उत्पादों पर शुल्क और करों में छूट (आरओडीटीईपी) योजना का विस्तार 31 दिसंबर तक होना निर्यातकों के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है। यह कदम भारत की निर्यात प्रतिस्पर्धा को बनाए रखने में मदद करेगा, खासकर चुनौतीपूर्ण और बदलते वैश्विक व्यापार माहौल में। यह जानकारी उद्योग मंडल सीआईआई के राष्ट्रीय निर्यात समिति के अध्यक्ष संजय बुधिया ने शनिवार को साझा की।


आरओडीटीईपी योजना की विशेषताएँ

आरओडीटीईपी योजना की शुरुआत 2021 में हुई थी। इस योजना के तहत निर्यातकों को उन करों, शुल्कों और उपकरों की वापसी की जाती है, जो वस्तुओं के निर्माण और वितरण में शामिल होते हैं और जिनकी भरपाई केंद्र, राज्य या स्थानीय स्तर पर लागू किसी अन्य व्यवस्था के तहत नहीं होती। निर्यातकों को इस योजना के तहत 0.3 प्रतिशत से 3.9 प्रतिशत तक की दर से कर वापसी मिलती है।


निर्यातकों के लिए संभावनाएँ

पैटन इंटरनेशनल लिमिटेड के प्रबंध निदेशक बुधिया ने कहा कि इस योजना के विस्तार से निर्यात की कीमतों को अधिक प्रभावी ढंग से निर्धारित करने और दीर्घकालिक अनुबंधों को प्राप्त करने में मदद मिलेगी। उन्होंने बताया, 'यह समय पर किया गया विस्तार निर्यातकों को महत्वपूर्ण समर्थन प्रदान करता है और भारत की निर्यात प्रतिस्पर्धा को बनाए रखने में सहायक होगा।'


भारत का निर्यात आंकड़ा

भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) ने इस योजना को 30 सितंबर, 2026 तक जारी रखने की सिफारिश की है। चालू वित्त वर्ष 2026-27 में, अप्रैल से अगस्त के बीच भारत का निर्यात 17.85 प्रतिशत बढ़कर 215.91 अरब डॉलर तक पहुंच गया, जबकि आयात 18.21 प्रतिशत बढ़कर 363 अरब डॉलर रहा।


सरकार का लक्ष्य

सरकार ने इस वित्त वर्ष में वस्तुओं और सेवाओं के निर्यात को 1,000 अरब डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा है, जबकि वित्त वर्ष 2025-26 में यह आंकड़ा 863 अरब डॉलर था।