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निवेश के नए विकल्प: सेबी ने पोर्टफोलियो प्रबंधन नियमों में बदलाव किए

सेबी ने पोर्टफोलियो प्रबंधन सेवाओं के लिए नए नियमों को मंजूरी दी है, जिससे निवेश के विकल्पों में वृद्धि होगी। अब पोर्टफोलियो प्रबंधक ग्राहकों के धन को आईपीओ, विदेशी प्रतिभूतियों और ऋण साधनों में निवेश कर सकेंगे। नए नियमों के तहत, निवेश की न्यूनतम राशि 25 लाख रुपये होगी और प्रबंधन शुल्क 1 प्रतिशत तक सीमित रहेगा। इसके अलावा, स्वतंत्र कोष प्रबंधक की व्यवस्था भी लागू की गई है। जानें इस नई व्यवस्था के सभी पहलुओं के बारे में।
 

निवेश के विकल्पों में वृद्धि

पोर्टफोलियो प्रबंधन सेवाओं के माध्यम से निवेश करने वाले ग्राहकों के लिए नए विकल्प उपलब्ध होने जा रहे हैं। सेबी ने पोर्टफोलियो प्रबंधकों के लिए नए नियमों को स्वीकृति दे दी है। अब, ये प्रबंधक ग्राहकों के धन को आईपीओ, विदेशी प्रतिभूतियों और प्राथमिक बाजार में जारी होने वाले ऋण साधनों में निवेश कर सकेंगे।


सेबी के नए नियम

हालिया जानकारी के अनुसार, सेबी के बोर्ड ने सेबी (पोर्टफोलियो प्रबंधक) विनियम, 2026 को मंजूरी दी है। यह नया नियम 2020 में लागू मौजूदा व्यवस्था का स्थान लेगा। सेबी का कहना है कि इस नई व्यवस्था का उद्देश्य पोर्टफोलियो प्रबंधन सेवाओं के क्षेत्र को विकसित करना, नियमों का पालन सरल बनाना, विभिन्न प्रावधानों को एकत्रित करना और अप्रचलित नियमों को हटाना है।


निवेश की नई संभावनाएं

नई व्यवस्था के तहत, पोर्टफोलियो प्रबंधक आईपीओ और ऋण बाजार में पहली बार जारी होने वाली प्रतिभूतियों में निवेश कर सकेंगे। इसके अतिरिक्त, डिस्क्रेशनरी पोर्टफोलियो प्रबंधन सेवा ग्राहकों की कुल प्रबंधित संपत्ति का 10 प्रतिशत तक निवेश-योग्य, गैर-परिवर्तनीय और बिना लिस्टिंग किए गए ऋण साधनों में लगा सकेगी, जिसके लिए ग्राहक की सहमति आवश्यक होगी।


डेरिवेटिव साधनों में निवेश

सेबी ने शेयर बाजार में कारोबार होने वाले डेरिवेटिव साधनों में निवेश की सीमा को अधिक लचीला बनाया है। इसके तहत, ग्राहक की प्रबंधित संपत्ति के 1.25 गुना तक इन साधनों में निवेश किया जा सकेगा।


विदेश में निवेश की सुविधा

विदेश में निवेश के लिए भी रास्ता आसान किया गया है। डिस्क्रेशनरी और गैर-विवेकाधीन दोनों प्रकार की सेवाएं देने वाले पोर्टफोलियो प्रबंधक विदेशी शेयर और ऋण प्रतिभूतियों के अलावा रियल एस्टेट निवेश न्यास, विदेशी म्यूचुअल फंड, कारोबार वाले कोष, इंडेक्‍स कोष और विदेशी सरकारी ऋण में निवेश कर सकेंगे। हालांकि, ये निवेश विदेशी मुद्रा प्रबंधन कानून और भारतीय रिजर्व बैंक की उदारीकृत धन प्रेषण योजना के तहत होंगे।


म्यूचुअल फंड में निवेश

सेबी ने सीधे म्यूचुअल फंड में निवेश के लिए भी पोर्टफोलियो प्रबंधक मार्ग शुरू किया है, जिसे म्यूचुअल फंड इकाइयों में निवेश के लिए प्राइम नाम दिया गया है। इसके माध्यम से ग्राहक का धन म्यूचुअल फंड की सीधे निवेश वाली योजनाओं, कारोबार वाले कोष, सूचकांक कोष और विशेष निवेश कोष में लगाया जा सकेगा।


निवेश की न्यूनतम राशि

इस व्यवस्था के तहत न्यूनतम निवेश राशि 25 लाख रुपये होगी। नए ढांचे के तहत काम करने वाली संस्था के लिए कम से कम 2 करोड़ रुपये की शुद्ध संपत्ति आवश्यक होगी। मुख्य अधिकारी के पास स्नातक डिग्री, सीएफए या सीए योग्यता के साथ प्रतिभूति बाजार का कम से कम दो साल का अनुभव और निर्धारित प्रमाणपत्र होना अनिवार्य होगा।


प्रबंधन शुल्क और निकासी

प्राइम में संबद्ध या समूह की एसेट प्रबंधन कंपनियों की योजनाओं में निवेश की अधिकतम सीमा 25 प्रतिशत रखी गई है। प्रबंधन शुल्क ग्राहक की कुल प्रबंधित संपत्ति का अधिकतम 1 प्रतिशत होगा, जबकि प्रदर्शन के आधार पर शुल्क लेने की भी अनुमति होगी। निकासी शुल्क से छूट का प्रावधान भी किया गया है।


स्वतंत्र कोष प्रबंधक की व्यवस्था

सेबी ने स्वतंत्र कोष प्रबंधक की नई व्यवस्था भी बनाई है। ये प्रबंधक पंजीकृत पोर्टफोलियो प्रबंधक के साथ मिलकर ग्राहकों के पोर्टफोलियो का संचालन कर सकेंगे, लेकिन उनकी सभी गतिविधियों की जिम्मेदारी पंजीकृत पोर्टफोलियो प्रबंधक की होगी। ग्राहक को स्वतंत्र कोष प्रबंधक के हटने या सेवा समाप्त होने पर बाहर निकलने का अनिवार्य विकल्प मिलेगा।


निवेश के दायरे का विस्तार

इसके अलावा, योग्य कोष प्रबंधकों को विदेश में निवेश करने वाले पात्र निवेश कोषों का प्रबंधन और सलाह देने की अनुमति होगी। भारतीय प्रतिभूतियों में निवेश करने वाले ऐसे कोषों के लिए सीमा मौजूदा विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक व्यवस्था के अनुसार बनी रहेगी। कुल मिलाकर, नई व्यवस्था पोर्टफोलियो प्रबंधन सेवाओं में निवेश के दायरे को बढ़ाने और नियमों को सरल बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण बदलाव लेकर आई है।