नोएडा में श्रमिकों का प्रदर्शन हिंसक, वेतन वृद्धि की मांग
नोएडा में श्रमिकों का उग्र प्रदर्शन
नोएडा के फेस-2 औद्योगिक क्षेत्र में श्रमिकों का आंदोलन तेजी से बढ़ता जा रहा है। सोमवार को यह प्रदर्शन अचानक हिंसक हो गया, जब विभिन्न कंपनियों के बाहर प्रदर्शन कर रहे कर्मचारियों ने हंगामा शुरू कर दिया। खासकर मदरसन कंपनी के बाहर स्थिति बेकाबू हो गई, जहां प्रदर्शनकारियों ने पत्थरबाजी की, कई वाहनों में आग लगा दी और पूरे क्षेत्र में यातायात बाधित कर दिया।
वेतन वृद्धि की मांग का कारण
इस विवाद की जड़ रिचा ग्लोबल नामक कंपनी को माना जा रहा है। जानकारी के अनुसार, रिचा ग्लोबल की एक यूनिट हरियाणा के फरीदाबाद में स्थित है, जहां श्रमिक पिछले कुछ दिनों से वेतन वृद्धि की मांग कर रहे थे। कंपनी प्रबंधन ने वहां 35 प्रतिशत तक वेतन वृद्धि को मंजूरी दी, जिसके तहत तकनीकी स्टाफ की सैलरी 20,000 और गैर-तकनीकी स्टाफ की सैलरी 15,000 कर दी गई।
नोएडा के श्रमिकों की समान मांग
फरीदाबाद में वेतन वृद्धि के फैसले के बाद, नोएडा फेस-2 में रिचा ग्लोबल की चार अन्य फैक्ट्रियों में कार्यरत सैकड़ों श्रमिकों ने भी समान वेतन वृद्धि की मांग शुरू कर दी। उनका कहना है कि जब कंपनी ने फरीदाबाद यूनिट में वेतन बढ़ाया है, तो नोएडा के कर्मचारियों के साथ भेदभाव क्यों किया जा रहा है।
प्रदर्शन का विस्तार
श्रमिकों की मांग है कि सभी कर्मचारियों की न्यूनतम सैलरी 20,000 रुपये की जाए। यह विवाद अब केवल रिचा ग्लोबल तक सीमित नहीं रहा, बल्कि आसपास की अन्य एक्सपोर्टर कंपनियों और औद्योगिक इकाइयों में भी फैल गया है। बड़ी संख्या में श्रमिक सड़कों पर उतर आए, जिससे औद्योगिक क्षेत्र में कामकाज प्रभावित हुआ।
प्रशासन की कार्रवाई
इस प्रदर्शन को नियंत्रित करने के लिए पुलिस और प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी मौके पर पहुंचे। श्रम आयुक्त समेत कई अधिकारियों ने कंपनी प्रबंधन के साथ घंटों तक बातचीत की। प्रदर्शन कर रहे श्रमिकों की मुख्य मांगें हैं कि उनका वेतन 20,000 रुपये मासिक किया जाए, बैंक खाते में 30 नवंबर तक बोनस दिया जाए, और किसी भी कर्मचारी को अनावश्यक रूप से सेवा से न निकाला जाए।
श्रमिकों की निराशा
प्रशासन का दावा है कि श्रमिकों की अधिकांश मांगों को लिखित रूप में मान लिया गया है और फैक्ट्री मालिकों को निर्देश दिए गए हैं कि वे श्रमिकों की समस्याओं का समाधान करें। हालांकि, श्रमिकों का कहना है कि वेतन वृद्धि के मुद्दे पर उन्हें अभी तक कोई ठोस आश्वासन नहीं मिला है और कंपनी प्रबंधन इस पर टालमटोल कर रहा है। इसी कारण उनका आक्रोश बढ़ता जा रहा है और प्रदर्शन जारी है।