पाकिस्तान की मरी ब्रेवरी ने शराब निर्यात की शुरुआत की
पाकिस्तान में शराब निर्यात की नई शुरुआत
पाकिस्तान के नेताओं ने आर्थिक लाभ के लिए कुरान के निर्देशों को नजरअंदाज कर दिया है। कुरान में शराब पीने को निषिद्ध बताया गया है। पिछले लगभग 50 वर्षों से पाकिस्तान में मुसलमानों के लिए शराब पर प्रतिबंध था, लेकिन अब देश की एकमात्र स्थानीय स्वामित्व वाली ब्रेवरी, 'मरी ब्रेवरी', ने शराब का निर्यात शुरू कर दिया है। यह कंपनी अपनी बीयर और अन्य मादक पेय उन देशों में भेज रही है जो इस्लामिक सहयोग संगठन के सदस्य नहीं हैं। कंपनी के निर्यात प्रबंधक रमीज शाह के अनुसार, अप्रैल में यूनाइटेड किंगडम, जापान, पुर्तगाल और थाईलैंड जैसे देशों को निर्यात शुरू किया गया है। मरी ब्रेवरी पिछले कई वर्षों से गैर-मादक पेय जैसे पैकेज्ड जूस, मिनरल वाटर और फल के स्वाद वाले माल्ट का निर्यात कर रही थी।
मरी ब्रेवरी की स्थापना का इतिहास
'मरी ब्रेवरी' की स्थापना 1860 में एडवर्ड डायर और एडवर्ड व्हिम्पर द्वारा की गई थी, जिसका उद्देश्य अंग्रेजी सैनिकों को बीयर की आपूर्ति करना था। 1947 में यह ब्रेवरी एक पारसी परिवार के स्वामित्व में आ गई, और वर्तमान में पाकिस्तान नेशनल असेंबली के सदस्य इस्फानयार भंडारा इसके मालिक हैं। उनकी पहल पर पाकिस्तान सरकार ने शराब और बीयर के निर्यात की अनुमति दी है।
चीनी ब्रेवरी का सहयोग
इस्फानयार भंडारा ने अपनी कंपनी 'मरी ब्रेवरी' के लिए निर्यात खोलने के लिए बलूचिस्तान में चीन द्वारा स्थापित ब्रेवरी का सहारा लिया। यह चीनी ब्रेवरी 2021 में चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे (CPEC) के तहत चीनी कर्मचारियों के लिए बनाई गई थी।
1977 तक शराब की उपलब्धता
1977 तक पाकिस्तान में आम लोगों के लिए शराब उपलब्ध थी, लेकिन इस्लामिक दलों के दबाव में तत्कालीन प्रधानमंत्री जुल्फीकार अली भुट्टो ने मुसलमानों के लिए शराब पर प्रतिबंध लगा दिया। इसके बाद से मरी ब्रेवरी ने गैर-मुस्लिमों और विदेशियों के लिए लाइसेंस प्राप्त दुकानों के माध्यम से बीयर और शराब उपलब्ध कराई।
1977 में निर्यात पर प्रतिबंध
पाकिस्तान सरकार ने 1977 में शराब और बीयर के निर्यात पर प्रतिबंध लगा दिया था। इससे पहले, 'मरी ब्रेवरी' भारत, अफगानिस्तान और अमेरिका को भी शराब का निर्यात करती थी। 2025 में निर्यात की अनुमति मिलने के बाद, मरी ब्रेवरी विदेशों में अपने कारोबार को बढ़ाने के लिए नेटवर्क तैयार कर रही है।