पीएम मोदी की अपील: सोने और तेल की खरीदारी पर रोक लगाने की आवश्यकता
प्रधानमंत्री की अपील पर चर्चा
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की हालिया अपील ने लोगों का ध्यान आकर्षित किया है। वैश्विक परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए, उन्होंने नागरिकों से अनुरोध किया है कि वे संभव हो तो वर्क फ्रॉम होम करें, स्वदेशी उत्पादों को प्राथमिकता दें, एक साल तक सोने की खरीदारी से बचें, और सार्वजनिक परिवहन का उपयोग करके ईंधन की बचत करें। इस पर विभिन्न प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने इस बयान को पीएम मोदी की नीतियों की विफलता का संकेत बताया है।
सोने के आयात पर चिंता
भारत में सोने की मांग बहुत अधिक है, लेकिन यह एक समस्या भी बन गई है। देश की लगभग 99 प्रतिशत सोने की जरूरत आयात से पूरी होती है। पिछले कुछ वर्षों में सोने की कीमतों में भारी वृद्धि हुई है, लेकिन आयात में कमी आई है। वित्तीय दृष्टिकोण से, सोने के आयात पर खर्च में लगभग 24 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।
मिनिस्ट्री ऑफ कॉमर्स के अनुसार, 2025-26 में भारत ने 71.98 अरब डॉलर का सोना आयात किया। यह खर्च पिछले तीन वर्षों में दोगुना हो गया है।
तेल की आवश्यकता और खर्च
भारत में तेल का उपयोग हर क्षेत्र में होता है, जिससे देश को भारी मात्रा में तेल और गैस का आयात करना पड़ता है। वर्तमान में, भारत हर साल लगभग 11.32 लाख करोड़ रुपये कच्चे तेल और उससे जुड़े उत्पादों पर खर्च कर रहा है। ईरान-अमेरिका के बीच तनाव और वैश्विक बाजार में कीमतों में वृद्धि के कारण भारत की आर्थिक स्थिति प्रभावित हो रही है।
पीएम मोदी ने सार्वजनिक परिवहन के उपयोग की बात की है ताकि तेल पर निर्भरता कम की जा सके।
खाद पर खर्च
भारत कृषि पर निर्भर है और खाद का आयात भी करता है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, इस वर्ष खाद के आयात पर खर्च 18 बिलियन डॉलर तक पहुंच सकता है।
स्वदेशी उत्पादों का महत्व
भारत को कच्चा तेल, खाद, सोना और अन्य आवश्यक वस्तुओं का आयात करना पड़ता है। यदि कीमतें बढ़ती रहीं, तो अगले एक साल में भारत का खर्च काफी बढ़ जाएगा।
सोने के आयात में 24 प्रतिशत और खाद के आयात में 77 प्रतिशत की वृद्धि ने चिंता बढ़ा दी है।