पुरानी कारों के लिए कर्ज में तेजी से वृद्धि, नए वाहन ऋण की तुलना में अधिक
पुरानी कारों के कर्ज में वृद्धि
पिछले पांच वर्षों में, पुरानी कारों के लिए कर्ज में वृद्धि नए वाहन ऋण की तुलना में अधिक तेजी से हुई है, हालांकि इसका आधार छोटा है। एक नई रिपोर्ट में यह जानकारी दी गई है।
क्रेडिट सूचना कंपनी की रिपोर्ट
क्रेडिट सूचना कंपनी क्रिफ हाई मार्क द्वारा जारी रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय उपभोक्ताओं ने अपनी खरीदारी के लिए वित्तीय संस्थानों से कर्ज लेना प्राथमिकता दी है। रिपोर्ट में बताया गया है कि पुरानी कारों के वित्तपोषण का बकाया इस वर्ष जून में 1.3 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया, जो जून 2021 में लगभग 40,000 करोड़ रुपये था। इस दौरान, इसमें सालाना 26.2 प्रतिशत की वृद्धि दर दर्ज की गई।
नए वाहन ऋण का बकाया
इसके विपरीत, नए वाहन ऋण का बकाया इस साल जून में 9.9 लाख करोड़ रुपये हो गया, जबकि जून 2021 में यह 4.4 लाख करोड़ रुपये था। पिछले पांच वर्षों में, इसमें संचयी रूप से 17.6 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। क्रिफ हाई मार्क ने यह भी कहा कि वित्तीय संस्थानों ने पुरानी कारों के क्षेत्र में अधिक दबाव के बावजूद कर्ज देना जारी रखा है।
कर्ज की स्थिति
पुरानी कारों के कर्ज में 31 से 90 दिन तक बकाया रहने वाले ऋणों का अनुपात बढ़कर 3.1 प्रतिशत हो गया, जबकि वाहन ऋण में यह केवल 2.1 प्रतिशत रहा। 91 से 180 दिन तक बकाया रहने वाले ऋणों के मामले में, पुरानी कारों के कर्ज का अनुपात 1 प्रतिशत रहा, जबकि वाहन ऋण में यह 0.6 प्रतिशत था। रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया है कि कर्ज के बोझ के संदर्भ में, वाहन ऋण और पुरानी कारों के ऋण लेने वालों की संख्या लगभग समान है।
बिना गारंटी वाले उपभोक्ता कर्ज
हालांकि, पुरानी कार ऋण श्रेणी में बिना गारंटी वाले उपभोक्ता कर्ज जैसे व्यक्तिगत ऋण, टिकाऊ उपभोक्ता सामान ऋण और क्रेडिट कार्ड ऋण लेने वाले ग्राहकों का अनुपात अधिक है। यह अनुपात पुरानी कार ऋण में 9.2 प्रतिशत है, जबकि वाहन ऋण में यह 6.4 प्रतिशत है। रिपोर्ट में कहा गया है कि दोपहिया और वाणिज्यिक वाहन वित्तपोषण को शामिल करने वाले ‘व्हील्स फाइनेंस’ क्षेत्र में कुल मिलाकर परिसंपत्ति गुणवत्ता स्थिर रही है।
वाणिज्यिक वाहन क्षेत्र की वृद्धि
वाणिज्यिक वाहन क्षेत्र में भी पिछले पांच वर्षों में तेज वृद्धि देखी गई है। इस खंड में बकाया 20.1 प्रतिशत की संचयी वृद्धि के साथ 7.4 लाख करोड़ रुपये हो गया, जो पहले तीन लाख करोड़ रुपये था।