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पेंशनर्स संगठनों की 8वें वेतन आयोग के सामने नई मांगें

भारत पेंशनर्स समाज ने 8वें केंद्रीय वेतन आयोग के समक्ष अपनी मांगों का एक विस्तृत खाका प्रस्तुत किया है। इसमें न्यूनतम पेंशन को 45000 रुपये करने, पेंशन की समीक्षा हर पांच साल में करने, और स्वास्थ्य सुविधाओं में सुधार की मांग शामिल है। संगठन का मानना है कि मौजूदा पेंशन व्यवस्था में सुधार आवश्यक है, खासकर महंगाई के बढ़ते प्रभाव को देखते हुए। आयोग की मंजूरी के बाद ही इन प्रस्तावों पर अंतिम निर्णय होगा।
 

नई दिल्ली में पेंशनर्स की मांगें


नई दिल्ली: 8वें केंद्रीय वेतन आयोग के समक्ष पेंशनर्स संगठनों ने अपनी मांगों का एक विस्तृत खाका प्रस्तुत किया है। भारत पेंशनर्स समाज ने पेंशन व्यवस्था में महत्वपूर्ण बदलाव की आवश्यकता पर जोर देते हुए न्यूनतम पेंशन को 45000 रुपये करने का प्रस्ताव रखा है। संगठन का मानना है कि रिटायरमेंट के समय मिलने वाली पेंशन अंतिम बेसिक वेतन का 67 प्रतिशत होनी चाहिए, जबकि योग्य परिवारों को 50 प्रतिशत फैमिली पेंशन मिलनी चाहिए। हालांकि, इन प्रस्तावों को आयोग की मंजूरी अभी प्राप्त नहीं हुई है और अंतिम निर्णय सरकार की प्रक्रिया के बाद ही होगा.


45000 रुपये की पेंशन और 67% का प्रस्ताव

भारत पेंशनर्स समाज की सबसे महत्वपूर्ण मांग न्यूनतम मासिक पेंशन को 45000 रुपये तक बढ़ाने की है। इसके अलावा, संगठन ने पेंशन को कर्मचारी के अंतिम बेसिक वेतन से जोड़ने का सुझाव दिया है। प्रस्ताव के अनुसार, अंतिम बेसिक वेतन का 67 प्रतिशत पेंशन के रूप में मिलना चाहिए। कर्मचारी की मृत्यु के बाद परिवार को मिलने वाली पेंशन भी अंतिम बेसिक वेतन का 50 प्रतिशत करने की मांग की गई है। संगठन का कहना है कि महंगाई और जीवन-यापन की लागत में वृद्धि को देखते हुए मौजूदा व्यवस्था में सुधार आवश्यक है.


हर पांच साल में पेंशन की समीक्षा की आवश्यकता

पेंशनर्स संगठन ने केवल मौजूदा पेंशन में वृद्धि की बात नहीं की है, बल्कि भविष्य के लिए नियमित समीक्षा की भी मांग की है। प्रस्ताव में कहा गया है कि पेंशन और वेतन की समीक्षा हर पांच साल में होनी चाहिए, ताकि लंबे समय तक अगले वेतन आयोग का इंतजार न करना पड़े। इसके साथ ही, DA और DR की समीक्षा हर तीन महीने में करने का सुझाव दिया गया है। संगठन चाहता है कि इसके लिए तीन महीने के औसत को आधार बनाया जाए। DR 25 प्रतिशत से ऊपर पहुंचने पर उसे मूल पेंशन में मिलाने की भी मांग की गई है.


स्वास्थ्य सुविधाओं से लेकर कम्यूटेड पेंशन तक कई मांगें

पेंशनर्स समाज ने स्वास्थ्य सुविधाओं को लेकर भी कई प्रस्ताव दिए हैं। संगठन ने CGHS को मजबूत करने, कैशलेस इलाज की सुविधा बढ़ाने और 5000 रुपये का फिक्स्ड मेडिकल अलाउंस देने की मांग की है। ग्रामीण और CGHS से बाहर रहने वाले पेंशनर्स के लिए भी बेहतर स्वास्थ्य सुरक्षा की बात कही गई है। कम्यूटेड पेंशन को लेकर 11 साल बाद या 71 वर्ष की उम्र में, जो पहले हो, बहाली का प्रस्ताव है। इसके अलावा, 65 वर्ष की उम्र से अतिरिक्त पेंशन और हर पांच साल पर उसमें बढ़ोतरी की मांग की गई है.


8वें CPC के निर्णय पर सभी की नजरें

भारत पेंशनर्स समाज ने संशोधित वेतन, पेंशन और भत्तों को 1 जनवरी 2026 से लागू करने की मांग भी की है। साथ ही, HRA और LTC जैसे लाभों को पात्र पेंशनर्स तक पहुंचाने तथा कुछ स्वायत्त और वैधानिक संस्थाओं के पेंशनर्स को भी लाभ देने का सुझाव दिया गया है। BSNL पेंशनर्स से जुड़े पेंशन-पैरिटी और स्वास्थ्य सुविधाओं के मुद्दे भी प्रस्ताव में शामिल हैं। वर्तमान में, 8वां वेतन आयोग विभिन्न संगठनों और हितधारकों से सुझाव ले रहा है। इसलिए इन मांगों पर चर्चा आने वाले समय में तेज हो सकती है, लेकिन अंतिम निर्णय आयोग की सिफारिश और सरकार की मंजूरी के बाद ही होगा.