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पेट्रोल और डीजल की कीमतों में स्थिरता, कच्चे तेल में गिरावट का असर नहीं

हाल ही में कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट आई है, लेकिन भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतें स्थिर बनी हुई हैं। जानिए इसके पीछे के कारण और भविष्य में राहत मिलने की संभावनाएं क्या हैं। क्या वाहन चालकों को जल्द ही राहत मिलेगी? इस लेख में जानें सभी महत्वपूर्ण जानकारी।
 

कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट से उम्मीदें बढ़ीं

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में आई तेज गिरावट ने उपभोक्ताओं की उम्मीदों को बढ़ा दिया है। इस स्थिति में वाहन मालिकों की नजरें इस बात पर हैं कि क्या पेट्रोल और डीजल के दाम भी कम होंगे। हाल ही में सरकारी तेल कंपनियों ने 27 जून के लिए नए रेट जारी किए हैं। हालांकि, वैश्विक बाजार में क्रूड ऑयल की कीमतें कम हुई हैं, लेकिन देश के प्रमुख शहरों में ईंधन की कीमतें स्थिर बनी हुई हैं। इसके पीछे के कारण भी स्पष्ट हो गए हैं।


पेट्रोल-डीजल की कीमतें स्थिर

सरकारी तेल कंपनियों ने 27 जून के लिए जारी नई दरों में कोई बदलाव नहीं किया है। पिछले एक महीने से पेट्रोल और डीजल की कीमतें अपरिवर्तित हैं। आखिरी बार 25 मई को पेट्रोल में 2.61 रुपये प्रति लीटर और डीजल में 2.71 रुपये प्रति लीटर की वृद्धि की गई थी। इसके बाद से देशभर में पुराने रेट लागू हैं।


शहरों में ईंधन की कीमतें

दिल्ली में पेट्रोल की कीमत 102.12 रुपये और डीजल की कीमत 95.20 रुपये प्रति लीटर है। मुंबई में पेट्रोल 111.21 रुपये और डीजल 97.83 रुपये प्रति लीटर बिक रहा है। चेन्नई में पेट्रोल 107.77 रुपये और डीजल 99.55 रुपये है। कोलकाता में पेट्रोल 113.51 रुपये और डीजल 99.82 रुपये प्रति लीटर मिल रहा है। नोएडा, लखनऊ, चंडीगढ़ और पटना में भी पुराने रेट ही लागू हैं।


कच्चे तेल की गिरावट के कारण

अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड की कीमत लगभग 3.84 प्रतिशत गिरकर 72.60 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गई, जबकि डब्ल्यूटीआई क्रूड 69.23 डॉलर प्रति बैरल पर बंद हुआ। पिछले सप्ताह में ब्रेंट में लगभग 10.86 प्रतिशत और डब्ल्यूटीआई में 9.62 प्रतिशत की गिरावट आई है। विशेषज्ञों का मानना है कि पश्चिम एशिया में तनाव में कमी और 60 दिन के सीजफायर पर सहमति बनने से सप्लाई को लेकर चिंताएं कम हुई हैं।


क्यों नहीं मिली राहत?

कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट के बावजूद पेट्रोल और डीजल की कीमतें तुरंत नहीं घटती हैं। भारत में तेल कंपनियां कीमतें तय करते समय पिछले 15 दिन या एक महीने की औसत लागत को ध्यान में रखती हैं। इसी कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में आई ताजा गिरावट का असर खुदरा ईंधन कीमतों पर अभी तक नहीं पड़ा है। यदि क्रूड ऑयल लंबे समय तक सस्ता रहता है, तो भविष्य में राहत मिलने की संभावना बन सकती है।


भविष्य की संभावनाएं

विशेषज्ञों का कहना है कि वर्तमान में तेल कंपनियां पेट्रोल पर अच्छा मार्जिन कमा रही हैं, जबकि डीजल पर हल्का नुकसान हो रहा है। भारत अपनी जरूरत का 88 प्रतिशत से अधिक कच्चा तेल विदेशों से आयात करता है। यदि वैश्विक बाजार में कीमतें लंबे समय तक नीचे रहती हैं, तो आयात बिल कम होगा, महंगाई पर दबाव घटेगा और भविष्य में पेट्रोल-डीजल की कीमतों में राहत मिलने की संभावना बढ़ सकती है।