पेट्रोल और डीजल की कीमतों में स्थिरता, निर्यात शुल्क में वृद्धि
नई दिल्ली में ईंधन की कीमतों में कोई बदलाव नहीं
नई दिल्ली: पेट्रोल और डीजल खरीदने वालों के लिए बुधवार को एक सकारात्मक समाचार आया है। केंद्र सरकार ने ईंधन के निर्यात पर शुल्क बढ़ाने का निर्णय लिया है, लेकिन घरेलू बाजार में ईंधन की कीमतें अपरिवर्तित रहीं हैं। सरकारी तेल विपणन कंपनियों ने 2 सितंबर की कीमतें जारी की हैं, जिससे यह स्पष्ट होता है कि टैक्स बढ़ने के बावजूद आम उपभोक्ताओं पर कोई अतिरिक्त वित्तीय बोझ नहीं पड़ा है।
दिल्ली में पेट्रोल की वर्तमान कीमत
2 सितंबर को दिल्ली में बिना एथेनॉल वाले पेट्रोल की कीमत 167.35 रुपये प्रति लीटर है। E5 पेट्रोल की कीमत 109.24 रुपये प्रति लीटर है, जबकि 20 प्रतिशत एथेनॉल मिश्रण वाले E20 पेट्रोल की कीमत 102.12 रुपये प्रति लीटर है। विभिन्न प्रकार के पेट्रोल की कीमतें उनके मिश्रण और श्रेणी के अनुसार भिन्न हैं।
टैक्स वृद्धि का आम आदमी पर प्रभाव
निर्यात शुल्क में वृद्धि के संबंध में सबसे बड़ा प्रश्न यह है कि क्या इसका असर आम जनता की जेब पर पड़ेगा। वर्तमान में इसका उत्तर नकारात्मक है। विंडफॉल टैक्स घरेलू बिक्री पर लागू नहीं होता, बल्कि यह निर्यात पर लगाया जाता है। इसलिए देश में पेट्रोल और डीजल खरीदने वाले ग्राहकों के लिए इन शुल्कों का कोई सीधा प्रभाव नहीं पड़ा है।
डीजल पर निर्यात शुल्क में वृद्धि
सरकार की नई नीति के तहत, डीजल के निर्यात पर कुल शुल्क 25 रुपये प्रति लीटर निर्धारित किया गया है। इसमें 24 रुपये प्रति लीटर विशेष अतिरिक्त उत्पाद शुल्क (SAED) और 1 रुपये प्रति लीटर सड़क और बुनियादी ढांचा उपकर शामिल है। पेट्रोल पर 1.50 रुपये प्रति लीटर शुल्क SAED के रूप में लिया जाएगा।
पेट्रोल पर शुल्क की शून्यता
इससे पहले, 15 अगस्त को पेट्रोल के निर्यात पर शुल्क को शून्य कर दिया गया था। उस समय डीजल पर 24 रुपये और एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) पर 19.50 रुपये प्रति लीटर शुल्क था। अब नई समीक्षा के बाद, पेट्रोल पर फिर से 1.50 रुपये का शुल्क लगाया गया है, जबकि डीजल के शुल्क में भी 1 रुपये की वृद्धि हुई है।
शुल्क की नियमित समीक्षा
पेट्रोलियम उत्पादों के निर्यात पर यह शुल्क व्यवस्था 27 मार्च 2026 से लागू है। सरकार हर 15 दिन में इसकी समीक्षा करती है। शुल्क में बदलाव अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल, पेट्रोल, डीजल और ATF की औसत कीमतों के आधार पर किया जाता है। सरकार का उद्देश्य घरेलू बाजार में पेट्रोलियम उत्पादों की पर्याप्त उपलब्धता बनाए रखना और आवश्यकता पड़ने पर निर्यात को हतोत्साहित करना है।