पेट्रोल-डीजल की कीमतों में स्थिरता, क्या मिलेगी राहत?
पेट्रोल-डीजल की दरें: राहत की एक किरण
पेट्रोल-डीजल की दरें: महंगाई के बढ़ते दबाव के बीच आज आम जनता को थोड़ी राहत मिली है। 29 मई को देशभर में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में कोई नई वृद्धि नहीं हुई। तेल कंपनियों ने पुराने रेट को बनाए रखा है, जिससे वाहन चालकों ने थोड़ी राहत महसूस की है।
हालांकि, सोमवार को पेट्रोल और डीजल की कीमतों में काफी बढ़ोतरी हुई थी। पिछले दो हफ्तों में चार बार दाम बढ़ने से लोगों का मासिक बजट प्रभावित हो चुका है। अब सभी की नजरें इस बात पर हैं कि क्या आने वाले दिनों में ईंधन की कीमतें कम होंगी या महंगाई का नया झटका लगेगा।
महानगरों में पेट्रोल की वर्तमान दरें
देश के विभिन्न शहरों में पेट्रोल की कीमतों में बड़ा अंतर देखने को मिल रहा है। दिल्ली में पेट्रोल की कीमत 102.12 रुपये प्रति लीटर है, जबकि मुंबई में यह 111.18 रुपये तक पहुंच गई है। कोलकाता में पेट्रोल 113.47 रुपये और चेन्नई में 107.77 रुपये प्रति लीटर पर बिक रहा है। वहीं, हैदराबाद में पेट्रोल की कीमत सबसे अधिक 115.69 रुपये प्रति लीटर है, जो वाहन चालकों की चिंता बढ़ा रही है।
डीजल की कीमतों का असर
डीजल की कीमतें भी राहत नहीं दे रही हैं। दिल्ली में डीजल 95.20 रुपये प्रति लीटर बिक रहा है, जबकि मुंबई में इसकी कीमत 97.83 रुपये है। कोलकाता में डीजल 99.82 रुपये और चेन्नई में 99.55 रुपये प्रति लीटर पर पहुंच गया है। हैदराबाद में डीजल का रेट 103.82 रुपये प्रति लीटर है। लगातार ऊंचे दामों का असर परिवहन से लेकर रोजमर्रा की चीजों तक देखने को मिल रहा है।
ईंधन की कीमतों में भिन्नता का कारण
पेट्रोल और डीजल की कीमतें पूरे देश में समान नहीं होतीं। इसका मुख्य कारण राज्यों द्वारा लगाए जाने वाले अलग-अलग वैट और स्थानीय सेस हैं। कुछ राज्यों में अधिक टैक्स होने के कारण वहां ईंधन महंगा बिकता है। यही कारण है कि दिल्ली जैसे शहरों में कीमतें थोड़ी कम हैं, जबकि हैदराबाद और कोलकाता जैसे शहरों में लोगों को अधिक कीमत चुकानी पड़ती है।
कीमतों में स्थिरता का कारण
अंतरराष्ट्रीय बाजार में हाल के दिनों में ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमतों में थोड़ी नरमी आई है। पश्चिमी एशिया में तनाव कम होने से तेल बाजार को राहत मिली है। इसी कारण घरेलू तेल कंपनियों ने आज कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया। हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि यदि वैश्विक हालात बिगड़ते हैं, तो ईंधन की कीमतों में फिर से वृद्धि हो सकती है।
रुपये की कमजोरी का प्रभाव
भारत अपनी आवश्यकताओं का अधिकांश कच्चा तेल विदेशों से आयात करता है। इस स्थिति में, डॉलर के मुकाबले रुपये की स्थिति सीधे पेट्रोल और डीजल की कीमतों को प्रभावित करती है। जब रुपया कमजोर होता है, तो तेल आयात महंगा हो जाता है, और इसका असर आम जनता पर बढ़ी हुई कीमतों के रूप में दिखाई देता है। आने वाले दिनों में डॉलर और कच्चे तेल की कीमतें तय करेंगी कि जनता को राहत मिलेगी या महंगाई और बढ़ेगी।