प्रधानमंत्री मोदी का वाहन उद्योग को नवाचार और उत्कृष्टता के लिए आह्वान
प्रधानमंत्री का संदेश
(फाइल फोटो के साथ) नयी दिल्ली, तीन सितंबर: प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भारत के ऑटोमोबाइल क्षेत्र से आग्रह किया है कि वे नवाचार को जारी रखें और 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य की दिशा में साहसिक कदम उठाएं। यह संदेश ‘सोसाइटी ऑफ इंडियन ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरर्स’ (सियाम) के वार्षिक सम्मेलन में प्रस्तुत किया गया। मोदी ने कहा कि हाल के मुक्त व्यापार समझौतों के चलते अंतरराष्ट्रीय बाजारों में बेहतर पहुंच के साथ, भारत का वाहन उद्योग वैश्विक स्तर पर अपनी उपस्थिति बढ़ाने के लिए तैयार है।
नवाचार और विकास के अवसर
सियाम के अध्यक्ष शैलेश चंद्रा ने प्रधानमंत्री का संदेश पढ़ते हुए कहा, ‘मैं भारतीय वाहन उद्योग से नवाचार को जारी रखने और विकसित भारत की दिशा में साहसिक कदम उठाने का आह्वान करता हूं।’ मोदी ने बताया कि इस यात्रा से परिवहन क्षेत्र में बदलाव के अवसर और उल्लेखनीय वृद्धि आएगी, जिससे राष्ट्रीय विकास को मजबूती मिलेगी। उन्होंने कहा, ‘पिछले एक दशक में भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में से एक रहा है। जैसे-जैसे हमारी अर्थव्यवस्था बढ़ रही है, वाहनों की मांग भी बढ़ रही है।’
बुनियादी ढांचे का विस्तार
प्रधानमंत्री ने बताया कि राजमार्गों और अन्य बुनियादी ढांचे के तेजी से विकास से लोगों और वस्तुओं की आवाजाही में सुधार हो रहा है, जिससे वाहन उद्योग के लिए नए अवसर उत्पन्न हो रहे हैं। उन्होंने कहा, ‘बेहतर संपर्क और अधिक दक्ष लॉजिस्टिक लागत को कम कर रहे हैं और भारतीय विनिर्माण को प्रतिस्पर्धी बना रहे हैं। इससे वाहन क्षेत्र मजबूत हो रहा है और भारत की आर्थिक वृद्धि में योगदान मिल रहा है।’
स्वच्छ परिवहन की दिशा में कदम
मोदी ने यह भी कहा कि भारत स्वच्छ और सतत परिवहन व्यवस्था की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठा रहा है। उन्होंने बताया, ‘चार्जिंग से जुड़े बुनियादी ढांचे के तेजी से विस्तार से इलेक्ट्रिक वाहनों को अपनाने में तेजी आ रही है और नवाचार के नए अवसर पैदा हो रहे हैं।’ प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि सियाम इस बदलाव को आकार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
सरकारी सुधारों का प्रभाव
प्रधानमंत्री ने कहा, ‘हाल के वर्षों में कारोबार सुगमता को बढ़ावा देने के लिए सरकार द्वारा किए गए सुधारों ने उद्योग को नई गति दी है। इनमें अप्रचलित कानूनों को हटाना और अनावश्यक अनुपालन समाप्त करना शामिल है। उत्पादन से जुड़े प्रोत्साहन (पीएलआई) योजना और ‘मेक इन इंडिया’ जैसी पहलों ने वाहन उद्योग की विनिर्माण क्षमताओं को और मजबूत किया है।’