प्रधानमंत्री मोदी ने एआई को अपनाने की आवश्यकता पर जोर दिया
कृत्रिम मेधा का समावेशी उपयोग
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने शुक्रवार को कहा कि कृत्रिम मेधा (एआई) का जिम्मेदारी से और समावेशी तरीके से उपयोग भारत की विकास यात्रा में महत्वपूर्ण योगदान देगा। उन्होंने बताया कि एआई उद्योगों में बदलाव लाने के साथ-साथ उत्पादकता और नवाचार के नए अवसर भी उत्पन्न कर रहा है।
भारतीय चार्टर्ड अकाउंटेंट्स संस्थान (आईसीएआई) द्वारा आयोजित 'एआई इनोवेशन समिट' में भेजे गए अपने संदेश में मोदी ने कहा कि तकनीकी प्रगति के चलते लेखांकन और वित्तीय पेशे में तेजी से परिवर्तन हो रहे हैं।
एआई के लाभ और जिम्मेदारी
मोदी ने कहा, "जब एआई-आधारित उपकरणों का उपयोग जिम्मेदारी से और मानव विवेक के साथ किया जाता है, तो ये कार्यकुशलता को बढ़ा सकते हैं, अनुपालन को मजबूत कर सकते हैं, बेहतर निर्णय लेने में सहायता कर सकते हैं और पेशेवरों को अधिक मूल्य प्रदान कर सकते हैं।"
राष्ट्रीय राजधानी में शुरू हुए दो दिवसीय सम्मेलन के उद्घाटन सत्र में प्रधानमंत्री का संदेश पढ़ा गया। उन्होंने यह भी बताया कि जैसे-जैसे भारत विकसित राष्ट्र बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है, एआई का समावेशी और जिम्मेदार उपयोग और भी महत्वपूर्ण होता जाएगा।
भारत के विकास के लिए सीए समुदाय का योगदान
सरकार 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने के लिए कई पहल कर रही है। मोदी ने चार्टर्ड अकाउंटेंट (सीए) समुदाय के योगदान की सराहना करते हुए कहा, "जैसे-जैसे भारत एआई युग के अवसरों को अपनाता है, मुझे विश्वास है कि सीए समुदाय वित्तीय क्षेत्र में नवाचार और उत्कृष्टता का नेतृत्व करेगा और ईमानदारी के उच्चतम मानकों को बनाए रखेगा।"
भारतीय चार्टर्ड अकाउंटेंट्स संस्थान (आईसीएआई) के पांच लाख से अधिक सदस्य हैं, जो संसद के एक अधिनियम के तहत स्थापित किया गया है।