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प्रश्नपत्र लीक की समस्या का समाधान तकनीकी उपायों से संभव: नंदन नीलेकणि

इन्फोसिस के सह-संस्थापक नंदन नीलेकणि ने प्रश्नपत्र लीक की समस्या के समाधान के लिए तकनीकी उपायों की आवश्यकता पर जोर दिया है। उन्होंने कहा कि यदि हम इस समस्या को व्यवस्थित तरीके से देखें और प्रौद्योगिकी का उपयोग करें, तो इसे हल किया जा सकता है। नीलेकणि ने परीक्षा सुधारों के लिए गठित कार्यबल के प्रमुख के रूप में अपने विचार साझा किए और बताया कि कैसे एआई का उपयोग प्रश्नपत्र तैयार करने में किया जा सकता है। उनके सुझावों से प्रधानमंत्री के उत्साह का भी जिक्र किया गया है।
 

प्रश्नपत्र लीक की समस्या पर नंदन नीलेकणि का दृष्टिकोण

 इन्फोसिस के सह-संस्थापक नंदन नीलेकणि ने मंगलवार को कहा कि परीक्षा के प्रश्नपत्र लीक होने की समस्या का समाधान एक व्यवस्थित तरीके से किया जा सकता है। उन्होंने इस मुद्दे से निपटने के लिए प्रौद्योगिकी के उपयोग की आवश्यकता पर जोर दिया। राष्ट्रीय राजधानी में आयोजित ‘ब्लूमबर्ग न्यू इकोनॉमी फोरम 2026’ में नीलेकणि ने कहा कि प्रश्नपत्र लीक की समस्या का समाधान संभव है और इसके लिए तकनीकी उपायों का सहारा लेना आवश्यक है। उन्होंने कहा, ‘‘यदि हम इस समस्या को व्यवस्थित दृष्टिकोण से देखें, इसके मूल कारणों की पहचान करें और समाधान के लिए तकनीक का उपयोग करें, तो हम इन समस्याओं का समाधान कर सकते हैं।’’ 


नीलेकणि ने आगे कहा, ‘‘ये सभी समस्याएं व्यवस्थागत हैं, जिनका समाधान हमारी समिति द्वारा किया जाएगा। मुझे विश्वास है कि प्रधानमंत्री हमारे सुझावों को लागू करने के लिए उत्सुक हैं।’’ नीलेकणि परीक्षा सुधारों के लिए गठित उच्चस्तरीय कार्यबल के प्रमुख हैं, जिसे जुलाई में स्थापित किया गया था। मई में राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा स्नातक (नीट-यूजी) का प्रश्नपत्र लीक होने के बाद चिकित्सा प्रवेश परीक्षा को रद्द करना पड़ा था, जिसके बाद छात्रों ने कई सप्ताह तक विरोध प्रदर्शन किया था।


 इन प्रदर्शनों के परिणामस्वरूप तत्कालीन केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया था। नीलेकणि ने कहा कि प्रश्नपत्र लीक को रोकने का एक उपाय यह है कि पहले से निर्धारित प्रश्नपत्र तैयार करने के बजाय प्रश्नों के एक बड़े संग्रह से अंतिम समय में प्रश्नपत्र बनाया जाए। जब उनसे पूछा गया कि क्या कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) की मदद से परीक्षा के दिन प्रश्नपत्र तैयार किया जा सकता है, तो उन्होंने सकारात्मक उत्तर दिया।


 उन्होंने यह भी बताया कि समिति सभी परीक्षाओं को कंप्यूटर आधारित परीक्षा में परिवर्तित करने के विकल्प पर विचार कर रही है। इसके लिए उन केंद्रों का नेटवर्क बढ़ाना होगा, जहां छात्र वर्तमान में ऐसी परीक्षाएं दे सकते हैं। वर्तमान में इन केंद्रों की संख्या लगभग 1.5 लाख है। भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (यूआईडीएआई) के पूर्व अध्यक्ष और आधार डिजिटल पहचान प्रणाली के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले नीलेकणि ने कहा कि बड़े पैमाने पर प्रौद्योगिकी का उपयोग करते समय उनका ध्यान इस बात पर रहता है कि इससे लोगों के लिए ऐसे समाधान तैयार हों, जो सभी के लिए लाभकारी हों।