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प्राथमिक एल्युमीनियम की कीमतों में वृद्धि से घरेलू उद्योगों पर असर

हाल ही में एक रिपोर्ट में बताया गया है कि प्राथमिक एल्युमीनियम की कीमतों में वृद्धि से घरेलू 'डाउनस्ट्रीम' उद्योगों की लागत बढ़ रही है। इससे उनके लाभ मार्जिन में कमी आ रही है और विनिर्माण क्षेत्र की प्रतिस्पर्धा प्रभावित हो रही है। भारत प्राथमिक एल्युमीनियम का दूसरा सबसे बड़ा उत्पादक है, लेकिन लगभग 3,500 एल्युमीनियम इकाइयों को कई संरचनात्मक चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। रिपोर्ट में शुल्क ढांचे में असंतुलन और एमएसएमई के सामने आने वाली समस्याओं पर भी प्रकाश डाला गया है।
 

एल्युमीनियम उद्योग की चुनौतियाँ

आयात समता मूल्य निर्धारण के कारण प्राथमिक एल्युमीनियम की कीमतों में वृद्धि हो रही है, जिससे घरेलू 'डाउनस्ट्रीम' उद्योगों की लागत में इजाफा हो रहा है। इससे उनके लाभ मार्जिन में कमी आ रही है और विनिर्माण क्षेत्र की प्रतिस्पर्धा प्रभावित हो रही है। एक अध्ययन में यह जानकारी दी गई है। पॉलिसी कंसेंसस सेंटर की रिपोर्ट के अनुसार, भारत प्राथमिक एल्युमीनियम का दूसरा सबसे बड़ा उत्पादक है, जिसकी सालाना स्थापित क्षमता 41.6 लाख टन से अधिक है।


संरचनात्मक चुनौतियाँ और रोजगार

हालांकि, देश की लगभग 3,500 एल्युमीनियम इकाइयाँ, जिनमें कई सूक्ष्म, लघु और मझोले उद्यम (एमएसएमई) शामिल हैं, कई संरचनात्मक समस्याओं का सामना कर रही हैं। रिपोर्ट में बताया गया है कि ये इकाइयाँ एल्युमीनियम मूल्य श्रृंखला में लगभग 90 प्रतिशत रोजगार प्रदान करती हैं और बिजली पारेषण, नवीकरणीय ऊर्जा, रेलवे, इलेक्ट्रिक वाहन, निर्माण और इंजीनियरिंग जैसे क्षेत्रों के लिए महत्वपूर्ण उत्पाद बनाती हैं।


आयात समता मूल्य निर्धारण का प्रभाव

रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया है कि घरेलू उत्पादक आयात समता मूल्य निर्धारण के आधार पर कीमतें निर्धारित करते हैं, जिसमें सीमा शुल्क भी शामिल होता है। इस व्यवस्था के कारण घरेलू खरीदारों को आयात के समान कीमत चुकानी पड़ती है, जिससे कच्चे माल की लागत में वृद्धि होती है। इससे परिचालन मार्जिन और भी सीमित हो जाता है, जिससे मूल्य संवर्धित विनिर्माण क्षेत्र की प्रतिस्पर्धा कमजोर होती है।


शुल्क ढांचे में असंतुलन

रिपोर्ट में शुल्क ढांचे में असंतुलन की ओर भी इशारा किया गया है। प्राथमिक एल्युमीनियम पर शुल्क कई तैयार उत्पादों की तुलना में अधिक है, जबकि आसियान, जापान और दक्षिण कोरिया के साथ मुक्त व्यापार समझौतों के कारण कई तैयार एल्युमीनियम उत्पाद रियायती या शून्य शुल्क पर भारत में आयात हो रहे हैं। इससे घरेलू एमएसएमई पर प्रतिस्पर्धात्मक दबाव बढ़ रहा है।


सुझाव और सिफारिशें

रिपोर्ट में सुझाव दिया गया है कि प्राथमिक एल्युमीनियम पर मूल सीमा शुल्क को धीरे-धीरे समाप्त किया जाए और उत्पादकों के लिए ऊर्जा लागत की भरपाई के उपाय किए जाएं। इसके अलावा, उत्पाद की उत्पत्ति के नियमों को सख्त करने, आवश्यक होने पर शुल्क-दर कोटा लागू करने, मुक्त व्यापार समझौतों के तहत सत्यापन व्यवस्था को मजबूत करने और अनुचित मूल्य पर होने वाले आयात के खिलाफ लक्षित व्यापारिक उपाय अपनाने की सिफारिश की गई है। रिपोर्ट के अनुसार, शुल्क का उचित निर्धारण डाउनस्ट्रीम एमएसएमई की प्रतिस्पर्धात्मकता को बढ़ाने, घरेलू विनिर्माण को प्रोत्साहित करने, मूल्य संवर्धन बढ़ाने और रोजगार सृजन में मदद करेगा।