बॉम्बे हाई कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला: एयरटेल और वोडाफोन आइडिया के स्पेक्ट्रम चार्ज रद्द
मुंबई में टेलीकॉम सेक्टर के लिए बड़ी राहत
मुंबई: भारत के टेलीकॉम उद्योग के लिए एक महत्वपूर्ण और सकारात्मक समाचार सामने आया है। बॉम्बे हाई कोर्ट ने केंद्र सरकार द्वारा भारती एयरटेल और वोडाफोन आइडिया पर लगाए गए 'वन-टाइम स्पेक्ट्रम चार्ज' को पूरी तरह से रद्द कर दिया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि कंपनियों ने जिन लाइसेंस समझौतों के आधार पर कार्य किया है, सरकार उन वित्तीय नियमों को मनमाने तरीके से नहीं बदल सकती।
अदालत का निर्णय
यह महत्वपूर्ण निर्णय जस्टिस एम.एस. सोनक और जस्टिस जितेंद्र जैन की बेंच द्वारा सुनाया गया। कोर्ट ने टेलीकॉम विभाग के 2012 के उस आदेश को खारिज कर दिया, जिसके तहत यह चार्ज लगाया गया था। इसके साथ ही, कंपनियों को भेजे गए डिमांड नोटिस भी रद्द कर दिए गए हैं, और सरकार को निर्देश दिया गया है कि वे मुकदमे के दौरान कंपनियों द्वारा जमा की गई बैंक गारंटी को तुरंत वापस करें।
विवाद का इतिहास
यह मामला तब शुरू हुआ जब सरकार ने उन टेलीकॉम कंपनियों पर एकमुश्त चार्ज लगाने का निर्णय लिया, जिनके पास 6.2 MHz से अधिक स्पेक्ट्रम था। हालांकि यह नीति 2012 में घोषित की गई थी, लेकिन इसे 1 जुलाई 2008 से लागू कर दिया गया, जिससे कंपनियों पर पुराना बकाया चुकाने का भारी बोझ आ गया।
इस नियम के तहत, भारती एयरटेल को लगभग 5201 करोड़ रुपये चुकाने का नोटिस मिला था, जबकि वोडाफोन आइडिया से लगभग 1069 करोड़ रुपये मांगे गए थे। दोनों कंपनियों की कुल देनदारी 6200 करोड़ रुपये से अधिक हो गई थी।
हाई कोर्ट की टिप्पणियाँ
फैसले में हाई कोर्ट ने कहा कि सरकार के पास पिछली तारीख से कोई टैक्स या चार्ज वसूलने का कानूनी अधिकार नहीं है। टेलीकॉम लाइसेंस सरकार और निजी कंपनियों के बीच एक समझौता होता है। जब दोनों पक्ष एक बार शर्तों पर सहमत हो जाते हैं, तो सरकार बिना किसी ठोस कानूनी आधार के बाद में नए वित्तीय नियम नहीं थोप सकती।
जजों ने यह भी बताया कि कंपनियां पहले से ही 1999 की राष्ट्रीय टेलीकॉम नीति के तहत रेवेन्यू-शेयरिंग सिस्टम के माध्यम से स्पेक्ट्रम का भुगतान कर रही हैं। ऐसे में, वर्षों बाद एक नया चार्ज लगाना पुराने समझौते को बदलने जैसा है। अदालत ने सरकार की इस दलील को भी खारिज कर दिया कि यह चार्ज सरकारी खजाने को बढ़ाने के लिए आवश्यक था। कोर्ट ने कहा कि केवल सरकार की आय बढ़ाना जनहित नहीं माना जा सकता, हर नए चार्ज का एक वैध कानूनी आधार होना चाहिए।
कंपनियों और बाजार पर प्रभाव
यह निर्णय ऐसे समय में आया है जब वोडाफोन आइडिया के हालात में सुधार हो रहा है और निवेशकों का विश्वास बढ़ रहा है। कंपनी के शेयर अप्रैल के निचले स्तरों से काफी ऊपर आ चुके हैं और यह बाजार पूंजीकरण के मामले में भारत की शीर्ष 50 मूल्यवान कंपनियों की सूची में फिर से शामिल होने के करीब पहुंच गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस पुरानी देनदारी के समाप्त होने से निवेशकों का विश्वास और मजबूत होगा।
बाजार की स्थिति
सोमवार को नेशनल स्टॉक एक्सचेंज पर वोडाफोन आइडिया का शेयर 4.01 प्रतिशत की गिरावट के साथ 14.35 रुपये पर बंद हुआ, जबकि भारती एयरटेल का शेयर 1.22 प्रतिशत की बढ़त के साथ 1820.10 रुपये पर रहा। कुल मिलाकर, हाई कोर्ट के इस निर्णय ने दोनों प्रमुख टेलीकॉम कंपनियों के सिर से एक बड़ा आर्थिक बोझ हटा दिया है और यह स्पष्ट कर दिया है कि व्यापारिक समझौतों के नियमों को पिछली तारीख से नहीं बदला जा सकता।