ब्रिक्स: उभरती अर्थव्यवस्थाओं का नया अध्याय
ब्रिक्स का उदय और विकास
लगभग 25 वर्ष पहले, वैश्विक निवेश कंपनी गोल्डमैन सैक्स के एक अर्थशास्त्री ने चार उभरती अर्थव्यवस्थाओं के लिए एक संक्षिप्त नाम 'ब्रिक' का निर्माण किया। उन्होंने अपनी शोध रिपोर्ट का शीर्षक 'बिल्डिंग बेटर ग्लोबल इकोनॉमिक ब्रिक्स' रखा, जो इन देशों की वैश्विक अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका और दीर्घकालिक संभावनाओं का प्रतीक बन गया। यह नाम धीरे-धीरे विश्वभर में लोकप्रिय हो गया और निवेश क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण शब्द बन गया।
ब्रिक्स का विस्तार
ब्राजील, रूस, भारत और चीन को इस नाम से संबोधित किया गया, जिन्हें वैश्विक आर्थिक विकास का प्रमुख चालक माना गया। 2010 में दक्षिण अफ्रीका के शामिल होने के बाद, इस समूह का नाम 'ब्रिक्स' में बदल गया। वर्तमान में, इस समूह में 11 सदस्य देश शामिल हैं, लेकिन नेताओं ने इस नाम को बनाए रखने का निर्णय लिया।
ईरान की वापसी
इस सप्ताहांत नई दिल्ली में होने वाले ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में ईरान एक बार फिर चर्चा का विषय बनेगा, क्योंकि अब वह समूह का सदस्य है। ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान इस सम्मेलन में भाग लेंगे। 2024 में मिस्र, इथियोपिया, ईरान, सऊदी अरब और यूएई पूर्ण सदस्य बने, जबकि इंडोनेशिया 2025 में शामिल होगा।
ब्रिक्स की ऐतिहासिक बैठकें
ब्रिक्स का औपचारिक गठन 2006 में न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा की बैठक के दौरान चार देशों के विदेश मंत्रियों की पहली बैठक में हुआ था। 2009 में रूस के येकातेरिनबर्ग में पहला शिखर सम्मेलन आयोजित किया गया, जिसमें तत्कालीन भारतीय प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और अन्य नेताओं ने भाग लिया।
ब्रिक्स का भविष्य
गोल्डमैन सैक्स के जिम ओ नील ने 2003 में 'ड्रीमिंग विद ब्रिक्स: द पाथ टू 2050' शीर्षक रिपोर्ट में भविष्यवाणी की थी कि ब्रिक्स देश 2039 तक पश्चिम की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं को पीछे छोड़ सकते हैं। इसके बाद, ब्रिक्स पर आधारित कई म्यूचुअल फंड और एक्सचेंज-ट्रेडेड फंड शुरू किए गए। 2014 में, ब्रिक्स विकास बैंक की स्थापना की गई, जिसे नव विकास बैंक (एनडीबी) कहा गया। वर्तमान में, 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन का आधिकारिक विषय 'मजबूती, नवाचार, सहयोग और निरंतरता के लिए निर्माण' है।