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भदोही में इंडिया कार्पेट एक्सपो 2026 की तैयारी शुरू

भदोही में 'इंडिया कार्पेट एक्सपो 2026' की तैयारियां शुरू हो गई हैं, जिसमें 56 देशों के लगभग 400 कालीन निर्यातकों को आमंत्रित किया गया है। यह एक्सपो चार से सात अक्टूबर तक आयोजित होगा और इसका उद्देश्य ब्रिक्स देशों के साथ व्यापारिक संबंधों को मजबूत करना है। इस मेले में भारतीय कालीन निर्माताओं और निर्यातकों की भागीदारी से भारत के निर्यात को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। जानें इस महत्वपूर्ण आयोजन की विशेषताएँ और संभावनाएँ।
 

इंडिया कार्पेट एक्सपो 2026 का आयोजन

भदोही, जो कालीन उद्योग का प्रमुख केंद्र है, में 'इंडिया कार्पेट एक्सपो 2026' की तैयारियां जोरों पर हैं। आयोजकों ने इस कार्यक्रम के लिए 56 देशों के लगभग 400 कालीन निर्यातकों को आमंत्रित किया है। इसके साथ ही, ब्रिक्स देशों के साथ व्यापारिक संबंधों को मजबूत करने की दिशा में भी प्रयास किए जा रहे हैं।


एक्सपो की विशेषताएँ

कालीन निर्यात संवर्धन परिषद (सीईपीसी) के अनुसार, यह एक्सपो एशिया के सबसे बड़े कालीन मेले के रूप में आयोजित किया जाएगा, जो चार से सात अक्टूबर तक भदोही में होगा। सीईपीसी केंद्रीय कपड़ा मंत्रालय के अधीन कार्यरत है। परिषद के चेयरमैन मुकेश कुमार गोम्बर ने बताया कि मंगलवार को तैयारियों को अंतिम रूप देने के लिए एक विस्तृत बैठक आयोजित की गई।


प्रतिनिधियों की भागीदारी

गोम्बर ने कहा, "हमने 56 देशों के 400 कालीन निर्यातकों को आमंत्रित किया है, साथ ही विभिन्न कालीन निर्माण कंपनियों के लगभग 350 प्रतिनिधियों को भी बुलाया जा रहा है।" इन प्रतिनिधियों के आने से भारतीय कालीन निर्माण और निर्यात कंपनियों को नए संसाधनों की खोज में मदद मिलेगी। उन्होंने यह भी बताया कि इंडिया कार्पेट एक्सपो 2026 एक महत्वपूर्ण उपलब्धि साबित होगा और विदेशी आयातकों में भी इसका खासा उत्साह है।


स्थानीय भागीदारी

लगभग 300 कालीन निर्माताओं और निर्यातकों के इस एक्सपो में भाग लेने की उम्मीद है। वे अपने उत्पादों का प्रदर्शन करेंगे और ऑर्डर प्राप्त करने का प्रयास करेंगे, जिससे भारत के निर्यात में वृद्धि होगी। सीईपीसी के वाइस-चेयरमैन असलम महबूब ने बताया कि इस साल अक्टूबर में भारत ब्रिक्स देशों की मेज़बानी करेगा।


ब्रिक्स प्रतिनिधिमंडल की यात्रा

ब्रिक्स देशों के एक प्रतिनिधिमंडल के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के निर्वाचन क्षेत्र वाराणसी आने की संभावना है। महबूब ने कहा कि सीईपीसी के प्रतिनिधि इन प्रतिनिधिमंडलों से मिलकर भारतीय हस्तनिर्मित कालीनों और फर्श पर बिछाए जाने वाले उत्पादों की गुणवत्ता प्रदर्शित करने के साथ-साथ वाणिज्यिक साझेदारी के अवसरों की खोज करेंगे। इस प्रकार के प्रयासों से भारत की वैश्विक स्रोत के रूप में स्थिति को और मजबूत किया जा सकेगा।