भारत-अमेरिका व्यापार समझौते पर जीटीआरआई की महत्वपूर्ण टिप्पणी
व्यापार समझौते की स्थिति
अमेरिकी वाणिज्य सचिव के बयान पर उठे सवाल
भारत और अमेरिका के बीच द्विपक्षीय व्यापार समझौता अभी भी अनिर्णीत है। दोनों देशों के प्रतिनिधियों के बीच कई बार बातचीत होने के बावजूद, कोई ठोस परिणाम नहीं निकल पाया है। दोनों पक्ष अपनी-अपनी शर्तों पर अड़े हुए हैं।
इस बीच, भारत के थिंक टैंक जीटीआरआई ने अमेरिकी वाणिज्य सचिव हॉवर्ड लुटनिक के बयान पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है। लुटनिक ने कहा था कि प्रधानमंत्री मोदी ने फोन करने के लिए सहमति दी थी, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी, क्योंकि अमेरिका पहले ही अन्य देशों के साथ व्यापार सौदों पर ध्यान केंद्रित कर चुका था।
जीटीआरआई की प्रतिक्रिया
जीटीआरआई ने स्पष्ट किया कि बड़े व्यापार समझौतों के लिए नेताओं के बीच केवल प्रतीकात्मक संवाद पर्याप्त नहीं है, बल्कि नीतिगत सहमति और हितधारकों के बीच तालमेल आवश्यक है। लुटनिक ने यह भी कहा था कि सौदे की संरचना तैयार थी, लेकिन अंतिम चरण में नेतृत्व स्तर की सीधी बातचीत की आवश्यकता थी।
लुटकिन के बयान का प्रभाव
जीटीआरआई के अनुसार, अमेरिकी वाणिज्य सचिव की टिप्पणी ने व्यापार वार्ता में हो रही देरी के बीच ध्यान को वास्तविक मुद्दों से हटा दिया है। संस्था ने कहा कि लुटनिक की व्याख्या से व्यापार वार्ताओं की जटिलता के बजाय और अधिक प्रश्न उठते हैं। जीटीआरआई ने यह भी सवाल उठाया कि यदि अमेरिका ने जुलाई 2025 में 'कोई सौदा नहीं' का निर्णय लिया था, तो फिर दोनों देशों के बीच महीनों तक बातचीत क्यों चलती रही।