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भारत-अमेरिका व्यापार समझौते पर वित्त मंत्री की सकारात्मक उम्मीदें

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने भारत-अमेरिका व्यापार समझौते की प्रगति पर सकारात्मक उम्मीदें जताई हैं। उन्होंने चीन के साथ व्यापार असंतुलन और ब्रिक्स के महत्व पर भी प्रकाश डाला। सीतारमण ने कहा कि भारत ने बातचीत को प्राथमिकता दी है और बुनियादी ढांचे में सार्वजनिक निवेश से अर्थव्यवस्था को मजबूती मिली है। जानें इस महत्वपूर्ण चर्चा के बारे में और अधिक जानकारी।
 

भारत और अमेरिका के बीच व्यापार समझौते की प्रगति

(फाइल फोटो के साथ) नई दिल्ली, 16 अक्टूबर। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने शुक्रवार को आशा व्यक्त की कि भारत और अमेरिका के बीच व्यापार समझौते को वैश्विक व्यापार और द्विपक्षीय आर्थिक संबंधों के लाभ के लिए शीघ्रता से अंतिम रूप दिया जाएगा। उन्होंने कहा, "हाल ही में भारतीय वाणिज्य मंत्री ने भी यह संकेत दिया है कि वे समझौते पर जल्द हस्ताक्षर की उम्मीद कर रहे हैं। बातचीत जारी है।"


सीतारमण ने आगे कहा, "मुझे विश्वास है कि इस समझौते को जल्द से जल्द पूरा किया जाएगा, जो वैश्विक व्यापार और दोनों देशों के व्यापारिक हितों के लिए महत्वपूर्ण है।" वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने बृहस्पतिवार को बताया कि भारत-अमेरिका व्यापार समझौते के पहले चरण को अंतिम रूप दिया जा चुका है और कानूनी मसौदे पर कार्य चल रहा है।


चीन के साथ व्यापार पर सीतारमण ने कहा कि कई वर्षों की बातचीत के बावजूद, व्यापार असंतुलन और भारतीय उत्पादों के लिए बाजार तक पहुंच पर पाबंदियां प्रमुख चिंताएं बनी हुई हैं। उन्होंने बताया कि भारत ने चीन में जेनेरिक दवाओं, गोवंश का मांस, सब्जियों और अन्य जल्दी खराब होने वाले उत्पादों के लिए बाजार तक पहुंच प्राप्त करने की कोशिश की है, लेकिन प्रगति सीमित रही है।


सीतारमण ने यह जानकारी थाईलैंड के बैंकॉक में अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) और विश्व बैंक की वार्षिक बैठकों के दौरान 'अटलांटिक काउंसिल' के साथ बातचीत में साझा की। उन्होंने कहा, "भारत और चीन के बीच व्यापार में गैर-शुल्क बाधाएं सबसे बड़ी रुकावट हैं।"


वित्त मंत्री ने कहा कि चीन ने पादप-स्वास्थ्य संबंधी उपायों और अन्य गैर-शुल्क प्रतिबंधों का उपयोग किया है, जबकि भारत ने व्यापारिक साझेदारों पर दंडात्मक शुल्क लगाने का विकल्प नहीं चुना है। इसके बजाय, भारत ने बातचीत को प्राथमिकता दी है, भले ही यह प्रक्रिया अधिक समय लेती हो।


ब्रिक्स के संदर्भ में, सीतारमण ने कहा कि इसे किसी देश या गुट के मुकाबले के रूप में नहीं देखना चाहिए, बल्कि यह साझेदारी के माध्यम से अपने लोगों के कल्याण के लिए बनाई गई है। उन्होंने कहा, "ब्रिक्स का उद्देश्य दूसरों का मुकाबला करना नहीं है, बल्कि साझेदारी को मजबूत करना है।"


सीतारमण ने बताया कि ब्रिक्स दुनिया की लगभग 40 प्रतिशत आबादी का प्रतिनिधित्व करता है और सदस्य देशों के बीच सहयोग से व्यापार बढ़ाने, आपसी समझ विकसित करने और आर्थिक अवसरों का विस्तार करने में मदद मिल सकती है। नए सदस्यों के शामिल होने से 11 से 12 देश एक-दूसरे के साथ सक्रिय रूप से जुड़ रहे हैं, जिनका वैश्विक व्यापार में लगभग 45 प्रतिशत हिस्सा है।


भारत की आर्थिक वृद्धि पर सीतारमण ने कहा कि वैश्विक व्यवधानों के बावजूद, देश ने मजबूत वृद्धि बनाए रखी है और पिछले चार से पांच वर्षों में, विशेषकर कोविड-19 महामारी के बाद, यह दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ने वाली प्रमुख अर्थव्यवस्था बना है। उन्होंने इस प्रदर्शन का श्रेय समावेशी वृद्धि, संसाधनों तक व्यापक पहुंच, युवाओं के कौशल विकास, राजकोषीय अनुशासन और सार्वजनिक पूंजीगत व्यय में वृद्धि को दिया।


वित्त मंत्री ने कहा कि बुनियादी ढांचे में सार्वजनिक निवेश ने लोगों को सीधे धन हस्तांतरित करने की तुलना में अर्थव्यवस्था को अधिक मजबूत गुणक प्रभाव दिया है। इससे रोजगार के अवसर भी बढ़े हैं और आर्थिक गतिविधियों को समर्थन मिला है। उन्होंने कहा कि बुनियादी ढांचे पर सार्वजनिक खर्च ने आर्थिक गतिविधियों के माध्यम से लोगों तक धन पहुंचाने में मदद की है, जबकि अन्य खर्च के तरीकों की तुलना में राजकोषीय घाटे पर कम दबाव पड़ा है।


सीतारमण ने कहा कि सरकार का उधार मुख्य रूप से बुनियादी ढांचे पर होने वाले खर्च के अनुरूप रहा है। उन्होंने कहा, "कर्ज लेकर परिसंपत्तियां बनाने से अर्थव्यवस्था को लाभ मिल रहा है।"