भारत-ईयू मुक्त व्यापार समझौता: विवाद समाधान के लिए मध्यस्थता प्रक्रिया शामिल
भारत और यूरोपीय संघ के बीच एफटीए का महत्व
भारत और यूरोपीय संघ (ईयू) के बीच हाल ही में संपन्न मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) में विवादों के त्वरित समाधान के लिए एक मध्यस्थता प्रक्रिया का प्रावधान किया गया है। इस समझौते में 'मॉडल मध्यस्थता प्रक्रिया' के तहत एक विशेष परिशिष्ट जोड़ा गया है। दोनों पक्षों ने इस समझौते की घोषणा 27 जनवरी को की थी।
इस समझौते पर विधिक परीक्षण के बाद हस्ताक्षर होने की संभावना है, और इसे अगले वर्ष लागू किया जा सकता है।
मध्यस्थता प्रक्रिया का विवरण
समझौते के अनुसार, भारत या ईयू में से कोई भी पक्ष द्विपक्षीय व्यापार पर प्रतिकूल प्रभाव डालने वाले किसी भी उपाय के खिलाफ मध्यस्थता की मांग कर सकता है। हालांकि, यह प्रक्रिया दोनों पक्षों की सहमति से ही शुरू होगी।
यदि निर्धारित समय-सीमा के भीतर मध्यस्थ की नियुक्ति पर सहमति नहीं बनती है, तो मध्यस्थता का अनुरोध स्वतः निरस्त हो जाएगा। मध्यस्थता प्रक्रिया उस क्षेत्र में होगी जहां अनुरोध भेजा गया है, या आपसी सहमति से किसी अन्य स्थान पर भी हो सकती है.
समझौते के अन्य महत्वपूर्ण पहलू
मध्यस्थ की नियुक्ति के 60 दिन के भीतर समाधान तक पहुंचने का प्रयास किया जाएगा। समझौते में 'विवाद निपटान' पर एक अलग अध्याय भी है, जिसका उद्देश्य विवादों के शीघ्र और प्रभावी समाधान की व्यवस्था करना है।
करीब दो दशकों की वार्ताओं के बाद संपन्न इस एफटीए के तहत भारत के 93 प्रतिशत निर्यात को 27 देशों के समूह में शुल्क-मुक्त पहुंच मिलेगी, जबकि ईयू से लक्जरी कार और वाइन का आयात सस्ता होगा। दोनों पक्ष मिलकर वैश्विक जीडीपी का लगभग 25 प्रतिशत और अंतरराष्ट्रीय व्यापार का एक-तिहाई हिस्सा रखते हैं.
डिजिटल व्यापार पर ध्यान
समझौते के पाठ में कुल 20 अध्याय शामिल हैं, जिनमें से एक अध्याय डिजिटल व्यापार पर भी है, जो कागज-रहित व्यापार और नियामकीय सहयोग को बढ़ावा देता है.