भारत-ओमान मुक्त व्यापार समझौता: ऊर्जा और आर्थिक सुरक्षा को मजबूती
भारत और ओमान के बीच मुक्त व्यापार समझौता
भारत और ओमान के बीच हाल ही में लागू हुआ मुक्त व्यापार समझौता खाड़ी क्षेत्र की अस्थिरता के बीच भारत की ऊर्जा और आर्थिक सुरक्षा को सुदृढ़ करेगा, ऐसा विशेषज्ञों का मानना है। यह समझौता एक जून से प्रभावी हो गया है।
सीआरएफ के अध्यक्ष शिशिर प्रियदर्शी ने कहा कि यह समझौता भारत की ऊर्जा और आर्थिक सुरक्षा को मजबूत करता है, क्योंकि ओमान लंबे समय से खाड़ी में भारत का एक विश्वसनीय साझेदार रहा है।
भारत तेल, गैस और पेट्रोरसायन के आयात में काफी निर्भर है। ओमान के साथ गहरे आर्थिक संबंधों से इस महत्वपूर्ण क्षेत्र में स्थिरता और मजबूती आएगी। अमेरिका-ईरान संघर्ष और होर्मुज जलडमरूमध्य में बाधाओं के कारण विभिन्न क्षेत्रों की आपूर्ति श्रृंखलाओं में रुकावट आई है। ओमान भारतीय व्यवसायों के लिए पश्चिम एशिया में विनिर्माण, लॉजिस्टिक और पुनःनिर्यात केंद्र के रूप में कार्य कर सकता है।
व्यापार समझौते का महत्व
प्रियदर्शी ने कहा कि इस मुक्त व्यापार समझौते का महत्व केवल द्विपक्षीय व्यापार आंकड़ों से कहीं अधिक है। यह महत्वपूर्ण आर्थिक संबंधों को सुरक्षित करने, भारतीय उद्योग के लिए नए अवसर उत्पन्न करने और यह संकेत देने का माध्यम है कि भारत वैश्विक व्यापार और संपर्क के अगले चरण में अग्रणी भूमिका निभाना चाहता है।
अंतरराष्ट्रीय व्यापार विशेषज्ञ दीप कपूरिया ने भी इसी तरह के विचार व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि इस समझौते के लागू होने से भारत को ओमान के साथ-साथ पूरे पश्चिम एशिया में अपनी बाजार हिस्सेदारी बढ़ाने में मदद मिलेगी।
निर्यात के अवसर
कपूरिया ने बताया कि इस समझौते के लागू होने के साथ ओमान को सभी निर्यात पर शून्य-शुल्क बाजार पहुंच, सरल नियामकीय प्रक्रियाएं और कम अनुपालन आवश्यकताओं का लाभ मिलेगा। हालांकि ओमान एक छोटा बाजार है, लेकिन यह इंजीनियरिंग, दवा, कृषि, खाद्य प्रसंस्करण, समुद्री उत्पाद, वस्त्र, रसायन, इलेक्ट्रॉनिक, रत्न और आभूषण जैसे क्षेत्रों में निर्यात के अवसर प्रदान करता है।
ओमान के साथ व्यापार का रणनीतिक महत्व
ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव के अनुसार, भारत के लिए ओमान के साथ व्यापार समझौता रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है। मस्कट का अधिकांश तट होर्मुज जलडमरूमध्य के बाहर स्थित है, जिससे क्षेत्रीय संघर्ष या भू-राजनीतिक अस्थिरता के दौरान भी ओमान भारत के लिए एक भरोसेमंद व्यापार और ऊर्जा मार्ग बना रह सकता है।
वित्त वर्ष 2025-26 में ओमान को भारत का निर्यात लगभग चार अरब अमेरिकी डॉलर रहा, जिसमें पेट्रोल और नेफ्था जैसे परिष्कृत पेट्रोलियम उत्पाद शामिल हैं। वहीं, भारत ने ओमान से 7.2 अरब अमेरिकी डॉलर का आयात किया, जिसमें कच्चा तेल और तरलीकृत प्राकृतिक गैस प्रमुख रहे।