भारत और अमेरिका की संयुक्त परियोजना से सोयाबीन उत्पादन में सुधार की उम्मीद
सोयाबीन उत्पादन के लिए नई तकनीकी पहल
भारत और अमेरिका के बीच एक नई परियोजना को नेशनल साइंस फाउंडेशन (एनएसएफ) से 5 लाख डॉलर से अधिक का वित्तीय समर्थन प्राप्त हुआ है, जिसका उद्देश्य सोयाबीन की उपज के लिए एक प्रभावी कृषि प्रणाली विकसित करना है। इस परियोजना का संचालन मेम्फिस विश्वविद्यालय के कंप्यूटर साइंस के प्रोफेसर जियाओलेई हुआंग द्वारा किया जा रहा है। इसमें मिसौरी विश्वविद्यालय, केनेसॉ स्टेट यूनिवर्सिटी, भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) दिल्ली, शेर-ए-कश्मीर कृषि विज्ञान और प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (जम्मू एवं कश्मीर), और भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के राष्ट्रीय सोयाबीन अनुसंधान संस्थान के शोधकर्ता शामिल हैं।
नेशनल साइंस फाउंडेशन (एनएसएफ) ने इस तीन साल की परियोजना के लिए 5,28,137 अमेरिकी डॉलर का वित्तपोषण किया है, जो 1 अक्टूबर से शुरू होकर 30 सितंबर, 2029 तक चलेगी। एनएसएफ ने बताया कि इस परियोजना के अंतर्गत फसलों और मिट्टी की स्थिति की निगरानी के लिए एक स्मार्ट सेंसर नेटवर्क विकसित किया जाएगा, जिसमें वायरलेस संचार और उन्नत एआई उपकरण शामिल होंगे। यह प्रणाली सोयाबीन फसल की स्थिति को बेहतर ढंग से समझने और निर्णय लेने में सहायता करेगी।
यह परियोजना एनएसएफ और भारत के इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के बीच सहयोग के तहत संचालित हो रही है।